पटना। बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज पार्टी की बड़ी जीत के बाद पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने आजतक से खास बातचीत में कहा कि भाजपा के सभी समीकरण ध्वस्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि जनता भाजपा की कार्यशैली से नाराज है और भाजपा ने बिहार पर नेतृत्व थोपा है।प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में जीतने वाली पार्टी अपना नेता चुन सकती है, लेकिन जनता के पास भी अपने मत के जरिए संदेश देने का अधिकार होता है। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर में जनसुराज को वोट देने वाले अधिकांश लोग भाजपा के पारंपरिक समर्थक थे। इन मतदाताओं ने भाजपा के खिलाफ इसलिए मतदान किया क्योंकि उन्हें पार्टी का अहंकार स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह रवैया स्वीकार्य नहीं कि किसी भी उम्मीदवार को टिकट दे दे और जनता को उसे ही वोट देना पड़े।
किशोर ने सम्राट चौधरी को जंगलराज का प्रतीक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार को जंगलराज से मुक्त कराने के नाम पर वोट लेने वाली भाजपा ने उसी दौर के एक चेहरे को मुख्यमंत्री बना दिया, जिसे लोगों ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि आम लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे मिलकर बात नहीं कह सकते, इसलिए मतदान ही अपनी राय जताने का सबसे बड़ा माध्यम है।प्रशांत किशोर ने दावा किया कि चुनाव परिणाम इस बात का संकेत हैं कि जनता का संदेश भाजपा तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के 422 बूथों में से 400 से अधिक बूथों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
‘भाजपा के सभी राजनीतिक समीकरण ध्वस्त हुए’
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम ने भाजपा के राजनीतिक आकलन को चुनौती दी है। उनका दावा था कि चुनाव में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं ने जन सुराज का समर्थन किया, जो पहले भाजपा के पारंपरिक वोटर माने जाते थे।
उन्होंने कहा कि इन मतदाताओं ने पार्टी बदलने का फैसला किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि भाजपा की कार्यशैली के प्रति असंतोष के कारण लिया। उनके मुताबिक, मतदाताओं ने यह संदेश दिया है कि राजनीतिक दल जनता की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
सम्राट चौधरी पर भी साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने बातचीत के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने बिहार में जिस नेतृत्व को आगे किया है, उसे जनता ने पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने वर्षों तक बिहार में जंगलराज के मुद्दे को प्रमुख चुनावी विषय बनाया, लेकिन अब उसी दौर से जुड़े एक चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया गया है। किशोर का कहना था कि इस फैसले को लेकर मतदाताओं के बीच असंतोष दिखाई दिया और उपचुनाव के नतीजों में उसका असर भी देखने को मिला।
हालांकि, यह प्रशांत किशोर का राजनीतिक बयान है और इस पर भाजपा की ओर से अलग राय हो सकती है।
आखिर में जानकारी देते चले कि, बांकीपुर उपचुनाव के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज होने की संभावना है। जन सुराज इस परिणाम को अपने जनाधार के विस्तार का संकेत बता रही है, जबकि अन्य राजनीतिक दल भी अपनी-अपनी व्याख्या सामने रख सकते हैं।फिलहाल, प्रशांत किशोर के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस जीत को केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत के रूप में पेश कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस उपचुनाव के नतीजों का असर राज्य की व्यापक राजनीतिक रणनीतियों और आगामी चुनावी समीकरणों पर किस तरह पड़ता है।
