नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। रिजिजू ने बुधवार, 26 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बताया है कि राहुल गांधी ने असम विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में पवन खेड़ा से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिनीकी भुइयां सरमा को लेकर कथित तौर पर झूठे आरोप लगाने को कहा था।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
ताजा राजनीतिक विवाद की शुरुआत पवन खेड़ा की ओर से किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। खेड़ा ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि राहुल गांधी के कारण भाजपा की स्थिति खराब हो रही है। इसी पोस्ट में उन्होंने किरेन रिजिजू पर भी तंज कसा और उनकी तैराकी को लेकर टिप्पणी की।
खेड़ा की टिप्पणी के बाद केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने भी सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया। उन्होंने पवन खेड़ा की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए तंज किया कि यदि खेड़ा आधे-अधूरे कपड़ों में तैरने की बात कर रहे हैं, तो वह असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से उनकी कथित अनुशासनहीनता की शिकायत करेंगे।
रिजिजू ने राज्यसभा सीट का भी उठाया मुद्दा
अपने जवाब में किरेन रिजिजू ने पवन खेड़ा की राज्यसभा सदस्यता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खेड़ा पहली बार राज्यसभा के लिए पहुंचे हैं, जबकि वह स्वयं आठ चुनाव लड़ चुके हैं। रिजिजू का कहना था कि राजनीतिक अनुभव या चुनावी सफर किसी व्यक्ति को किसी दूसरे नेता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का अधिकार नहीं देता।
इसी राजनीतिक बहस के दौरान रिजिजू ने अपना सबसे बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बताया कि असम चुनाव के अंतिम समय में राहुल गांधी के निर्देश पर पवन खेड़ा ने हिमंत बिस्वा सरमा और रिनीकी सरमा को लेकर आरोप लगाए थे।
रिजिजू ने दावा किया कि कथित आरोपों का कांग्रेस को राजनीतिक लाभ नहीं मिला और बाद में पवन खेड़ा को राज्यसभा सीट मिलने को उन्होंने उसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा। उन्होंने इसे कथित तौर पर ‘इनाम’ बताया।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई रिजिजू और खेड़ा की बहस अब राहुल गांधी, हिमंत बिस्वा सरमा और राज्यसभा सदस्यता तक पहुंच गई है। रिजिजू ने अपने आरोपों के समर्थन में कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं से मिली जानकारी का हवाला दिया है, लेकिन उन कथित नेताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
