नई दिल्ली।राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस मिशन के जरिए किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना में कम लागत में व्यवसाय शुरू करने की सुविधा है और मधुमक्खियों से खेतों में बेहतर परागण होता है, जिससे मुख्य फसल की पैदावार 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
इस मिशन के अंतर्गत सामान्य वर्ग के किसानों को 40 प्रतिशत तक और महिला तथा अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। सब्सिडी मधुमक्खी के बॉक्स, छत्ते और शहद निकालने वाली मशीनरी खरीदने पर उपलब्ध है। सरकार कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण भी प्रदान करती है।
शुद्ध और ऑर्गेनिक शहद की बाजार में अच्छी मांग है। मधुमक्खी पालन शुरू करने के बाद नियमित अंतराल पर शहद की पैदावार मिलती है। साथ ही मोम, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे उप-उत्पादों की बिक्री से भी अतिरिक्त आय हो सकती है, जिनकी कॉस्मेटिक और दवा कंपनियों में मांग रहती है। इस व्यवसाय के लिए अलग भूमि की जरूरत नहीं है और इसे खेत के कोने या मेड़ पर आसानी से शुरू किया जा सकता है।
50 प्रतिशत तक मिल रही सरकारी सब्सिडी
राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत किसानों को मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के अनुसार सामान्य वर्ग के किसानों को 40 प्रतिशत तक सब्सिडी, जबकि महिला किसानों तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ दिया जाता है।
यह सब्सिडी मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक उपकरणों, जैसे बी बॉक्स (मधुमक्खी बॉक्स), छत्ते और शहद निकालने वाली मशीन की खरीद पर उपलब्ध कराई जाती है। इससे शुरुआती लागत कम हो जाती है और छोटे एवं सीमांत किसान भी इस व्यवसाय को आसानी से शुरू कर सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्रों से मिलता है प्रशिक्षण
केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि सरकार किसानों को तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध करा रही है। देशभर के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और संबंधित कृषि संस्थानों के माध्यम से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मधुमक्खियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके रखरखाव, मौसम के अनुसार प्रबंधन, रोग नियंत्रण, शहद उत्पादन और विपणन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं। इससे नए किसान भी वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन शुरू कर सकते हैं और नुकसान की संभावना कम हो जाती है।
अंत में चलते चलते बता दे कि, बढ़ती उत्पादन लागत और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय अर्जित करने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। सरकारी सब्सिडी, तकनीकी प्रशिक्षण और कम निवेश की सुविधा के कारण यह व्यवसाय छोटे और बड़े सभी किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। साथ ही, बेहतर परागण के कारण मुख्य फसलों की पैदावार बढ़ने से खेती की कुल उत्पादकता में भी सुधार होता है। ऐसे में खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाकर किसान अपनी आय को अधिक स्थिर और टिकाऊ बना सकते हैं।
