नई दिल्ली।मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया है। यह फैसला पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर आधारित है। अदालत ने कहा कि पुरातात्विक व्याख्या अनुमान का विषय नहीं बल्कि बहु-विषयी वैज्ञानिक प्रक्रिया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या मामले के सिद्धांतों पर भी आधारित है।
एएसआई ने 2189 पेज की रिपोर्ट में नौ प्रमुख आधार प्रस्तुत किए। इनमें परिसर के नीचे 10वीं-11वीं शताब्दी के परमारकालीन मंदिर निर्माण के प्रमाण मिले। खुदाई में विशाल बेसाल्ट पत्थर, प्राचीन ईंटें और मंदिर शैली की नींव सामने आई। मौजूदा ढांचा बाद का बताया गया।
इस संबंध में हम आपको बता दें कि, एएसआई को कई संस्कृत शिलालेख मिले जिनमें स्थल को ‘शारदा सदन’ कहा गया है। ‘पारिजात मंजरी’ नाटक का शिलालेख भी मिला, जिसमें इसका पहला मंचन इसी सरस्वती मंदिर में होने का उल्लेख है। परिसर से 106 स्तंभ और 82 पिलास्टर मिले जिन पर हिंदू मंदिर वास्तुकला की नक्काशी, देवी-देवताओं की आकृतियां और पारंपरिक पैटर्न पाए गए।
