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इंदौर। मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इसे मंदिर घोषित करते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस स्थल पर हिंदू पूजा की निरंतरता कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की रिपोर्ट में भोजशाला परिसर से 94 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और अवशेष मिले। इनमें गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह और भैरव जैसी प्रतिमाएं शामिल हैं। साथ ही परमार कालीन सिक्के भी प्राप्त हुए, जो इस स्थल के प्राचीन इतिहास की पुष्टि करते हैं। अब एएसआई इसकी निगरानी करेगा।

राजा भोज द्वारा स्थापना

परमार वंश के राजा भोज ने वर्ष 1034 में इस भव्य संरचना की स्थापना की थी। उन्होंने यहां संस्कृत शिक्षा केंद्र और मां सरस्वती का मंदिर बनवाया, जिसे सरस्वती कंठाभरण महाविद्यालय के नाम से जाना जाता था। राजा भोज ज्ञान, कला और साहित्य के संरक्षक थे। बाद के काल में विभिन्न शासकों ने इस स्थल को क्षतिग्रस्त किया और मस्जिद में बदलने के प्रयास किए।भोजशाला के खंभों पर संस्कृत शिलालेख और परमार राजाओं की स्तुति वाले पाठ आज भी मौजूद हैं। कवि मदन के नाटक में भी इसका वर्णन मां सरस्वती के मंदिर के रूप में मिलता है। 19वीं सदी में ब्रिटिश मेजर किनकेड की खुदाई में मां सरस्वती की मूल प्रतिमा मिली, जिसे लंदन ले जाया गया।

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