नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का आगाज 27 जनवरी 2026 को हुआ, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह 11 बजे संसद के दोनों सत्रों को संबोधित किया। उनका अभिभाषण सिर्फ औपचारिक संबोधन नहीं था, बल्कि इसमें भारत की आर्थिक प्रगति, सामाजिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के कई अहम पहलुओं को सामने रखा गया।
ऐसे में कठिन वैश्विक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था को संभालने, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने का दर्जा बरकरार रखने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए बजट 2026 पर सबकी निगाहें टिकी हैं। वहीं, आम बजट को लेकर देशवासियों की 10 बड़ी उम्मीदें भी हैं।
दलित और गरीब कल्याण: सरकार लगातार समाज के कमजोर वर्गों के लिए नीतियाँ बना रही है।
महिला सशक्तिकरण: पिछले वर्ष 7 लाख महिलाएं लखपति बनीं; महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: रेलवे, सड़क, ऊर्जा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में नए कीर्तिमान स्थापित किए गए।
स्पेस सेक्टर में भारत: भारत ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उपग्रह क्षेत्र में लगातार सफलता हासिल की।
जीएसटी सुधार: कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाकर अर्थव्यवस्था में गति दी गई।
VB G और RAM G कानून: विशेष सामाजिक और आर्थिक सुधारों के लिए बनाए गए नए कानून।
ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सेना की वीरता और शौर्य को दर्शाने वाला सैन्य अभियान।
वैश्विक आर्थिक चुनौती: अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ और डॉलर के मुकाबले रुपया 92 पर।
आर्थिक सर्वेक्षण और बजट 2026: वित्त मंत्री नर्मला सीतारमण 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी और 1 फरवरी को बजट आएगा।
राजकोषीय अनुशासन: कठिन वैश्विक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था को संभालने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता।
जानकारी दे दें कि, वित्त मंत्री नर्मला सीतारमण 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करेंगी। इसमें देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, राजस्व संग्रह और कर सुधारों का विस्तृत आंकलन होगा। 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट 2026 ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर है, रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 92 पर है और व्यापारिक क्षेत्र को अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
ईस कड़ी में हम आपको बता दें कि, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण ने यह साफ किया कि भारत सरकार विकास, समानता और सामाजिक न्याय के मार्ग पर अग्रसर है। ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियान, महिला सशक्तिकरण, जीएसटी सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ इस बात की गवाही देती हैं कि सरकार देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
