पूर्वी लद्दाख, दक्षिण चीन सागर और ताइवान में चीन की आक्रामकता ने भारत और जापान को रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर मजबूर किया है। टोक्यो ने अपनी ‘जीरो वेपन’ नीति छोड़कर घातक हथियारों के निर्यात की अनुमति दे दी है।विश्व राजनीति में चीन की बढ़ती आक्रामकता चिंता का विषय बनी हुई है। दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप बनाना, ताइवान के पास सैन्य अभ्यास, भारत की सीमा पर घुसपैठ और पूर्वी लद्दाख में तनाव जैसी घटनाएं चीन के विस्तारवादी एजेंडे को दर्शाती हैं।
इस आक्रामकता ने एशिया के दो प्रमुख लोकतंत्रों भारत और जापान को पहले से कहीं ज्यादा करीब ला दिया है। दोनों देश QUAD जैसे मंचों पर सक्रिय हैं और रक्षा, प्रौद्योगिकी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर में साझेदारी बढ़ा रहे हैं। यह रिश्ता आर्थिक के साथ-साथ रणनीतिक सुरक्षा का भी है।दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान ने शांतिवादी संविधान अपनाया था और ‘जीरो वेपन’ नीति के तहत घातक हथियारों का निर्यात नहीं करता था। लेकिन 2026 में प्रधानमंत्री सना तकाइची की सरकार ने इस नीति को बदल दिया। अब जापान मिसाइल, युद्धपोत और लड़ाकू ड्रोन जैसे घातक हथियारों का निर्यात कर सकता है। यह बदलाव चीन और उत्तर कोरिया की बढ़ती धमकी का परिणाम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ता सहयोग केवल आर्थिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रमुख उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना भी है।
चीन की बढ़ती आक्रामकता बनी चिंता का विषय
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने कई मोर्चों पर अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ाई है। दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों का निर्माण, वहां सैन्य ढांचे को मजबूत करना, ताइवान के आसपास नियमित सैन्य अभ्यास और भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव जैसी घटनाओं ने क्षेत्रीय देशों की चिंताओं को बढ़ाया है।
भारत के लिए पूर्वी लद्दाख में उत्पन्न स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण विषय रही है। वहीं जापान भी पूर्वी चीन सागर और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। इन परिस्थितियों ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को नई दिशा दी है।
भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी हुई मजबूत
भारत और जापान पिछले कई वर्षों से रक्षा, आर्थिक सहयोग, तकनीकी विकास और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। हालांकि हाल के वर्षों में बदलते सुरक्षा वातावरण ने इस साझेदारी को और अधिक व्यापक बना दिया है।
दोनों देश QUAD (क्वाड) जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। क्वाड में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, जिसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित समुद्री वातावरण सुनिश्चित करना माना जाता है।
फिलहाल एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि भारत और जापान भविष्य में रक्षा, प्रौद्योगिकी, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने संबंधों को और अधिक गहरा कर सकते हैं। ऐसी साझेदारियां आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
