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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया है कि केंद्र के प्रतिनिधियों ने बिहार और असम सरकारों द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन शेयर किए हैं। इन नोटिफिकेशन में नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेने, गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा का भरोसा दिया गया है। CJP ने यह भी दावा किया कि सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे अन्य बीजेपी/एनडीए राज्यों में भी गारंटी-नोटिफिकेशन जारी करेंगे।

यहां यह बता दे कि, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटों बाद सरकार के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की। यह बैठक दो-तीन घंटे तक चली। उन्होंने बिहार और असम के उन नोटिफिकेशनों की कॉपी शेयर कीं, जिनमें एफआईआर वापस लेने, भविष्य में कोई कार्रवाई न करने और सभी हिरासत में लिए गए तथा गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की गारंटी दी गई है। दास ने आगे कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार और अन्य बीजेपी/एनडीए राज्यों द्वारा कल तक गारंटी नोटिफिकेशन जारी करने के अपने वादे को दोहराया है। उम्मीद है कि तय की गई भाषा का ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी भी प्रदर्शनकारी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

इस संबंध में दास ने एक और पोस्ट में कहा कि बिहार और असम में नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि राजस्थान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और न ही की जाएगी। वे लगातार कोशिश कर रहे हैं कि बीजेपी/एनडीए वाले बाकी सभी राज्य भी प्रदर्शनकारियों के हित में जरूरी भाषा में नोटिफिकेशन जारी करें।

यहां यह जानकारी देते चले नकि, असम सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि वह नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ शुरू किए गए आपराधिक मामलों और अन्य कानूनी कार्यवाहियों को वापस ले लेगी। राज्य के गृह और राजनीतिक विभाग के बयान के अनुसार, प्रदर्शनों के सिलसिले में पांच मामले दर्ज किए गए थे, जिसके चलते 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सरकार ने कहा कि मामले की समीक्षा के बाद उसने 26 जुलाई, 2026 को शाम 6 बजे से पहले दर्ज प्रदर्शन से जुड़े मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई भी प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई न करने का फैसला किया है। इसमें यह भी कहा गया कि जांच या ट्रायल के किसी भी चरण में होने के बावजूद ऐसे सभी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया कानून के अनुसार शुरू की जाएगी। बयान में आगे कहा गया कि अधिकारी गिरफ्तारियों की समीक्षा में तेजी लाएंगे और दर्ज मामलों के सिलसिले में हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करेंगे। इसमें यह भी जोड़ा गया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और मामले को बंद माना जाएगा।

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