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समाचार मिर्ची

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत तेजी से बढ़कर लगभग 126.31 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि दिन में यह 126.20 डॉलर तक पहुंची। इससे पहले यह 123.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थी।

यह कीमत मार्च 2022 के बाद सबसे ऊंची है, जब तेल 127.98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था। बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण कीमतों में करीब सात प्रतिशत की तेजी आई है। विशेषज्ञ हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल निर्यात पर संभावित प्रभाव को मुख्य वजह बता रहे हैं।ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि अगला पड़ाव 140 डॉलर होने जा रहा है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों की सलाह को बेकार बताते हुए कहा कि इन सुझावों के कारण तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।

वर्तमान में ईरान-अमेरिका के बीच नाजुक संघर्ष विराम है, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है। तेल बाजार इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका ने कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की तेजी ला दी है। खासतौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के बड़े हिस्से में तेल का निर्यात होता है। यदि इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है।

कुल मिलाकर, कच्चे तेल की कीमतों में आई यह तेजी केवल एक आर्थिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे जटिल भू-राजनीतिक कारण छिपे हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि वैश्विक शक्तियां इस संकट का समाधान कैसे निकालती हैं और इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर किस रूप में पड़ता है।

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