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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में अंदरूनी कलह उजागर हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीएम नेता पिनाराई विजयन को गले लगाने से इनकार कर दिया। 8 जून को हुई गठबंधन बैठक के एक ऑडियो में राहुल गांधी यह बयान देते सुनाई दिए।

राहुल गांधी ने कहा, “हमारी लड़ाइयां होती हैं लेकिन अगर आप मुझसे केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को गले लगाने के लिए कह रहे हैं तो मैं ऐसा नहीं कर सकता और न ही करूंगा, क्योंकि उनके साथ मेरी राजनीतिक लड़ाई चल रही है।” केरल में कांग्रेस और सीपीएम के बीच तीखी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। कांग्रेस ने हाल ही में विजयन को दो बार मुख्यमंत्री रहने के बाद सत्ता से बाहर किया है, हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल सहयोगी हैं।

इस टिप्पणी से गठबंधन की एकता पर सवाल उठने लगे हैं। पिनाराई विजयन ने कहा कि उनके बीच गले मिलने का रिवाज नहीं है और बातचीत औपचारिक अभिवादन या हाथ मिलाने तक सीमित रहती है। उन्होंने 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगाने की तस्वीरों का भी जिक्र किया।

ऑडियो क्लिप से शुरू हुआ विवाद

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 8 जून को हुई विपक्षी गठबंधन की एक बैठक से जुड़ी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है। इसमें राहुल गांधी यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि राजनीतिक मतभेदों को केवल प्रतीकात्मक तस्वीरों या सार्वजनिक मित्रता के जरिए समाप्त नहीं किया जा सकता।

राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा, “हमारी लड़ाइयां होती हैं, लेकिन अगर आप मुझसे केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को गले लगाने के लिए कह रहे हैं, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता और न ही करूंगा, क्योंकि उनके साथ मेरी राजनीतिक लड़ाई चल रही है।”

इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि क्या विपक्षी गठबंधन के भीतर सभी दल वास्तव में एकजुट हैं या फिर यह केवल राष्ट्रीय राजनीति तक सीमित सहयोग है।

क्या गठबंधन की एकता प्रभावित होगी?

फिलहाल कांग्रेस और सीपीएम की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि इस बयान का गठबंधन की कार्यप्रणाली पर तत्काल असर पड़ेगा। दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता बनाए रखने की आवश्यकता पर लगातार जोर देते रहे हैं।

फिर भी, यह घटना दर्शाती है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर विभिन्न दलों के अपने-अपने राजनीतिक हित और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं हैं। आने वाले समय में गठबंधन की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि सहयोगी दल राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीति के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक गठबंधनों में मतभेद असामान्य नहीं होते, लेकिन सार्वजनिक रूप से सामने आने वाले ऐसे बयान विपक्षी एकता की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि राहुल गांधी की टिप्पणी अब केवल एक व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि इंडिया गठबंधन की आंतरिक राजनीति पर व्यापक चर्चा का विषय बन गई है।

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