नई दिल्ली। गेहूं की खेती में ज्यादातर किसान अच्छे बीज, समय पर बुवाई और सिंचाई पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार छोटी सी गलती पूरी फसल की पैदावार पर असर डाल देती है। खासकर धान की कटाई के बाद जब उसी खेत में गेहूं बोया जाता है, तो खेत की सही तैयारी और बीज का सही ट्रीटमेंट बेहद जरूरी हो जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान बुआई से पहले खेत और बीज दोनों की सही तैयारी कर लें तो शुरुआती नुकसान से बचा जा सकता है।
यहां यह जानकारी दे दें कि, अगर किसान धान की कटाई के बाद गेहूं बोने जा रहे हैं तो सबसे पहले खेत को अच्छी तरह भुरभुरा बना लें। इसके बाद प्रति एकड़ 25 किलो यूरिया का छिड़काव करें। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे धान के बचे हुए डंठल जल्दी सड़ने लगते हैं, मिट्टी ज्यादा उपजाऊ बनती है और गेहूं की फसल के लिए खेत अच्छी तरह तैयार हो जाता है। गेहूं की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे सही मानी जाती है, हालांकि बलुई, भारी बलुई और मटियार मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है।
यहां यह जानना आवश्बियक हैं कि, ना बीज ट्रीटमेंट के बीज सीधे खेत में बोने से बीज सड़ सकता है, अंकुरण कम हो सकता है, पौधे कमजोर निकल सकते हैं और शुरुआती रोग पूरे खेत में फैल सकते हैं। कई बार दोबारा बुआई तक करनी पड़ जाती है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं। सही ट्रीटमेंट से जड़ें मजबूत बनती हैं, पौधे एक समान निकलते हैं और शुरुआती फफूंद तथा मिट्टी में मौजूद कीटों का असर कम हो जाता है।बीज ट्रीटमेंट का मतलब बुआई से पहले बीज पर ऐसी दवाओं या जैविक पदार्थों की हल्की परत चढ़ाना है, जो उसे शुरुआती रोगों और कीटों से बचाए। इसमें फफूंदनाशी, कीटनाशी, जैविक उत्पाद जैसे ट्राइकोडर्मा तथा सूक्ष्म पोषक तत्व या ग्रोथ बूस्टर शामिल होते हैं। हर किसान को सभी प्रकार के ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती, लेकिन गेहूं में शुरुआती फफूंद से बचाव को सबसे जरूरी माना जाता है।
