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नई दिल्ली। भारत में डेरी फार्मिंग ग्रामीण और छोटे शहरों में कमाई का बेहतरीन जरिया बन गया है। अगर नया डेरी फार्म शुरू करना चाहते हैं तो शुरुआती खर्च और मुनाफे की गणित समझना जरूरी है। डेरी फार्म खोलने के लिए अच्छी नस्ल की गाय-भैंस का चयन और खुली हवा वाली जगह का चुनाव महत्वपूर्ण है।

इस कड़ी में बता दें कि, डेरी फार्मिंग में कम लागत में अच्छा मुनाफा हो सकता है। दूध और डेरी उत्पादों की बाजार मांग हमेशा बनी रहती है। किसान गाय के गोबर से लेकर दूध तक बेचकर कमाई कर सकते हैं। गोबर का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में भी किया जा सकता है।उदाहरण के तौर पर, अगर 20 गाय-भैंस हों और प्रत्येक से रोज 10 लीटर दूध मिले तो कुल 200 लीटर दूध प्रतिदिन प्राप्त होता है। इसे 50 रुपये प्रति लीटर बेचने पर रोज 10 हजार रुपये की कमाई हो सकती है। महीने में लगभग तीन लाख रुपये की आय संभव है। देखभाल पर एक लाख रुपये खर्च करने पर भी दो लाख रुपये मुनाफा रह सकता है।

नियमित रखरखाव न करने पर नुकसान भी हो सकता है। नाबार्ड विभिन्न योजनाओं के तहत डेरी फार्म खोलने पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी देता है, जबकि एससी-एसटी किसानों को 33.33 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है। किसान, व्यक्तिगत उद्यमी, एनजीओ और कंपनियां इस योजना का लाभ ले सकती हैं।

डेरी फार्म शुरू करने से पहले जरूरी तैयारी

डेरी फार्म खोलने के लिए सबसे पहले उपयुक्त स्थान का चयन करना आवश्यक होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पशुओं के लिए खुली हवा, साफ पानी और पर्याप्त जगह होना जरूरी है। यदि पशुओं को अच्छा वातावरण मिलता है तो उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दूध उत्पादन भी बढ़ता है।

इसके अलावा अच्छी नस्ल की गाय या भैंस का चयन डेरी फार्मिंग की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में साहिवाल, गिर, जर्सी और होल्स्टीन फ्रिजियन जैसी गायों की नस्लें अधिक दूध उत्पादन के लिए लोकप्रिय मानी जाती हैं। वहीं मुर्रा भैंस भी डेरी व्यवसाय में काफी पसंद की जाती है।

चलते चलते बताते चले कि, किसानों को पशुओं के लिए शेड, चारे की व्यवस्था, पानी की सुविधा और नियमित सफाई का भी ध्यान रखना पड़ता है। डेरी फार्म की शुरुआत छोटे स्तर से की जा सकती है और बाद में जरूरत के अनुसार इसे बढ़ाया जा सकता है।डेरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक यानी नाबार्ड भी डेरी फार्मिंग के लिए किसानों को वित्तीय सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराता है।

जानकारी के अनुसार नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत डेरी फार्म खोलने पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है। इससे किसानों को शुरुआती निवेश का बोझ कम करने में मदद मिलती है। कई बैंक भी पशुपालन और डेरी व्यवसाय के लिए आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध कराते हैं।

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