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नई दिल्ली। डीजल के दामों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने खेती की लागत बढ़ा दी है। इससे अनाज, दालों और खाने के तेल के दाम बढ़ने की संभावना है। आधुनिक खेती मशीनों और ट्रांसपोर्टेशन पर निर्भर है, जहां डीजल मुख्य ईंधन के रूप में इस्तेमाल होता है।ट्रैक्टर से जुताई, पंपिंग सेट से सिंचाई और कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई जैसे कामों में डीजल की खपत बढ़ने से प्रति एकड़ खेती का खर्च बढ़ जाएगा। इसके अलावा उर्वरकों और अन्य कृषि उत्पादों की उत्पादन लागत भी महंगी पड़ने से किसानों पर बोझ बढ़ेगा। किसान इस अतिरिक्त लागत को सहन नहीं कर पाएंगे, जिससे अनाज और संबंधित वस्तुओं का बेस प्राइस बढ़ना तय माना जा रहा है।

बढ़ी हुई डीजल कीमतों का असर परिवहन पर भी पड़ेगा। खेतों से हरी सब्जियों, फलों और दूध को ट्रकों के माध्यम से मंडियों तक पहुंचाने में परिवहन लागत बढ़ जाएगी। चूंकि ये वस्तुएं जल्दी खराब होने वाली हैं, इसलिए बढ़े हुए माल भाड़े का बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर आएगा और बाजार में सब्जियां व दूध महंगे हो जाएंगे।

डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल खेत तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि उत्पादों के परिवहन पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा। देश में सब्जियां, फल, दूध और अनाज बड़ी मात्रा में ट्रकों और मालवाहक वाहनों के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य और गांवों से शहरों तक पहुंचाए जाते हैं। माल भाड़ा बढ़ने से व्यापारियों और सप्लाई चेन कंपनियों की लागत बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को महंगाई नियंत्रण और किसानों को राहत देने के बीच संतुलन बनाना होगा। कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और ईंधन कीमतों में बदलाव का असर सीधे करोड़ों किसानों और उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। आने वाले समय में सरकार की नीतियां और बाजार की स्थिति तय करेगी कि डीजल की इस बढ़ोतरी का असर कितना व्यापक होता है।

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