नई दिल्ली। भारत में कृषि का बड़ा योगदान है और करीब आधी आबादी खेती पर निर्भर है। कई सालों से किसान अपनी फसल बेचने के लिए स्थानीय मंडियों पर निर्भर रहे हैं। अब डिजिटल दौर में सिर्फ मंडियों के भरोसे रहना पुराना कल्चर बन चुका है। सरकार और नई टेक्नोलॉजी की मदद से छोटे और बड़े किसान अपनी फसल को सीधे विदेशी बाजारों में बेच सकते हैं। इससे उन्हें फसल का दोगुना दाम मिलता है और बिचौलियों से छुटकारा भी मिल जाता है।
हम आपको यहां जानकारी दे दें कि, विदेश में माल भेजने का पहला कदम सही फसल का चुनाव है। भारत के आम, केले, चावल, प्याज, लहसुन और मसालों की विदेशों में भारी मांग रहती है। किसानों को यह रिसर्च करनी होगी कि उनकी फसल की मांग किस देश में सबसे ज्यादा है। इसके लिए इंटरनेट या कृषि अधिकारियों से सलाह ली जा सकती है।जरूरी कागजात के रूप में IEC यानी आयात-निर्यात कोड बनवाना होता है। यह कोड विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी किया जाता है। इसकी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और आसान है। इसके लिए पैन कार्ड, बैंक खाता और बिजनेस का पता होना चाहिए। एक बार मिलने के बाद यह कोड हमेशा के लिए मान्य रहता है।
आखिर में बताते चले कि, IEC कोड मिलने के बाद किसानों को एपेडा यानी कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। एपेडा विदेशी खरीदार ढूंढने में मदद करती है और बताती है कि विदेश भेजने के लिए सामान की क्वालिटी कैसी होनी चाहिए। विदेशी बाजारों में साफ-सुथरा, एक ही साइज का और सुरक्षित सामान पसंद किया जाता है। इसलिए फसल की सफाई, ग्रेडिंग और सही पैकिंग जरूरी है। फसलों की जांच के लिए फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट भी लेना पड़ता है, जो यह साबित करता है कि फसल में कोई बीमारी या कीड़े नहीं हैं।
