राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत फूलों की कमर्शियल खेती शुरू करने पर सरकार कुल प्रोजेक्ट लागत पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। शादी-विवाह, धार्मिक उत्सवों, पार्टियों और सजावट के लिए गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा, जरबेरा तथा कंदीय फूलों जैसे ट्यूलिप और ग्लेडियोलस की मांग साल भर बनी रहती है। इस मांग को देखते हुए किसानों को पारंपरिक खेती से हटाकर उच्च लाभ वाली फसलों की ओर लाने के उद्देश्य से यह योजना चलाई जा रही है।
यहां यह जानकारी दे दें कि, सरकार ने अलग-अलग किस्म के फूलों के लिए प्रति हेक्टेयर मानक बजट तय किया है। कंदीय या कट फ्लावर्स के लिए तय लागत 1,50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर होने पर उद्यान विभाग 75,000 रुपये की सहायता देता है। गेंदे जैसे सामान्य खुले फूलों की खेती पर लगभग 20,000 से 40,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलती है। इससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, पौधे, खाद और कीटनाशक खरीदने में सहायता मिलती है।
योजना का लाभ देश का कोई भी किसान उठा सकता है। छोटे, सीमांत, अनुसूचित जाति-जनजाति और महिला किसानों को चयन में प्राथमिकता दी जाती है। आवेदक के पास खुद के नाम पर खेती योग्य जमीन होनी चाहिए अथवा कम से कम 5 से 10 साल का रजिस्टर्ड लीज एग्रीमेंट होना चाहिए। लाभ के लिए न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर से अधिकतम 2 से 4 हेक्टेयर तक का रकबा तय है। खेत में पानी की सही व्यवस्था और सिंचाई का प्रबंध होना आवश्यक है।आवेदन राज्य के डीबीटी हॉर्टिकल्चर पोर्टल पर ऑनलाइन किया जा सकता है। आवेदन के समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, जमीन की खसरा-खतौनी या जमाबंदी, निवास प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो तैयार रखने होंगे। ऑनलाइन आवेदन के बाद जिला उद्यान अधिकारी की टीम खेत का भौतिक सत्यापन करती है। सही पाए जाने पर सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर कर दी जाती है।
