नई दिल्ली।।गर्मियों के मौसम में ठंडे और रसीले तरबूज खाने का अपना ही मजा है। अगर ये तरबूज घर की छत पर गमले में उगे हों तो स्वाद और भी दोगुना हो जाता है। कई लोग मानते हैं कि तरबूज जैसी भारी बेल को केवल बड़े खेतों में ही उगाया जा सकता है, लेकिन सही तकनीक और देखभाल से इसे छोटे गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है।
तरबूज की जड़ें काफी फैलती हैं और फल का वजन भारी होता है। इसलिए कम से कम 18 से 24 इंच का बड़ा गमला या ग्रो बैग चुनना चाहिए। गमले के नीचे ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी जमा न हो। मिट्टी हल्की होनी चाहिए जिसमें पानी न ठहरे। इसके लिए 40 प्रतिशत बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत वर्मीकंपोस्ट या पुरानी गोबर की खाद, 20 प्रतिशत कोकोपीट और 10 प्रतिशत रेत या कंकड़ मिलाकर तैयार करें।
इस कड़ी में जानकारी दे दे कि, शुरुआत में पौधे की ग्रोथ के लिए हर 15 दिन में दो मुट्ठी गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाएं। फूल और छोटे फल आने पर पोटैशियम और फास्फोरस युक्त सीवीड लिक्विड फर्टिलाइजर या रॉक फास्फेट दें, जिससे फल बड़े और मीठे बनते हैं। तरबूज में 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी होता है, इसलिए फल सेट होने पर मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए। ओवर वाटरिंग से बचें, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। फल पूरे साइज में आकर पकने पर पानी कम कर दें।
सही गमला चुनना सबसे जरूरी
तरबूज की जड़ें तेजी से फैलती हैं और फल का वजन भी अधिक होता है। इसलिए छोटे गमले में इसकी खेती सफल नहीं मानी जाती। विशेषज्ञ कम से कम 18 से 24 इंच गहराई और चौड़ाई वाले बड़े गमले या मजबूत ग्रो बैग का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।
गमले के नीचे ड्रेनेज होल होना बेहद जरूरी है। इससे अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाता है और जड़ों में सड़न की समस्या नहीं होती। यदि पानी लंबे समय तक जमा रहे तो पौधे की बढ़वार रुक सकती है और फल खराब हो सकते हैं।
टेरेस गार्डनिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है और लोग अब सब्जियों के साथ-साथ फलों की खेती भी घर पर करने लगे हैं। तरबूज ऐसा फल है जिसे थोड़ी मेहनत और सही देखभाल के साथ गमले में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।घर पर उगाए गए तरबूज न केवल ताजे और स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि इनमें रसायनों का खतरा भी कम रहता है। ऐसे में यह शौक के साथ-साथ स्वास्थ्य और बचत दोनों के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकता है।
