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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली।सफेद हल्दी, जिसे आमा हल्दी या कर्पूरा हल्दी भी कहा जाता है, सेहत के लिए औषधीय मानी जाती है। बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है। घर में थोड़ी खाली जगह या गमले होने पर इसे आसानी से उगाया जा सकता है।सफेद हल्दी उगाने का सही समय अप्रैल से जून का महीना है। इसके लिए हल्की, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है। मिट्टी में गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाया जाना चाहिए। बाजार या नर्सरी से स्वस्थ गांठें लें। गमले या ग्रो बैग का आकार कम से कम 12 से 15 इंच का हो और तले में छेद हो ताकि पानी जमा न हो। गांठों को दो से तीन इंच गहराई में बोकर मिट्टी से ढक दें और हल्का पानी छिड़कें। गमले को ऐसी जगह रखें जहां दिन में चार से पांच घंटे धूप मिले।

इस कड़ी में हम आपको जानकारी दे दें कि, सफेद हल्दी को अधिक पानी की जरूरत नहीं होती। ऊपर की मिट्टी सूखी दिखने पर ही पानी दें। हर 20 से 25 दिनों में जैविक खाद डालते रहें। फसल पकने में सात से आठ महीने लगते हैं। पौधों की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें तो सिंचाई बंद कर मिट्टी खोदकर गांठें निकाल लें, साफ करके सुखा लें।बाजार में सफेद हल्दी की कीमत 150 रुपये से 400 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है, जो क्वालिटी और मांग पर निर्भर करती है। चार-पांच गमलों से घर की सालभर की जरूरत पूरी हो सकती है। खाली जमीन या बड़े गार्डन में 20-30 ग्रो बैग लगाकर छोटे स्तर पर इसे व्यवसाय भी बनाया जा सकता है। 30 किलो अच्छी क्वालिटी की सफेद हल्दी 400 रुपये प्रति किलो पर बेचने पर 12,000 रुपये की कमाई संभव है।

कैसी मिट्टी सबसे अच्छी रहती है

सफेद हल्दी के लिए हल्की, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी में पानी रुकने से गांठें सड़ सकती हैं, इसलिए जल निकासी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बुवाई से पहले मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिला दें। जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ पौधों की स्वस्थ वृद्धि में भी मदद करती है।

सफेद हल्दी लगाने का सही समय

सफेद हल्दी की बुवाई के लिए अप्रैल से जून का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस अवधि में तापमान और नमी का स्तर पौधों की शुरुआती वृद्धि के लिए अनुकूल रहता है। समय पर बुवाई करने से पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं और गांठों का आकार भी बेहतर बनता है।

सिंचाई और देखभाल

सफेद हल्दी को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने पर गांठें खराब हो सकती हैं। इसलिए केवल तब पानी दें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी दिखाई दे।

हर 20 से 25 दिनों के अंतराल पर गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट जैसी जैविक खाद डालते रहें। इससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहेंगे और गांठों का विकास अच्छा होगा।

साथ ही समय-समय पर खरपतवार हटाते रहें और यदि किसी प्रकार के कीट या रोग के लक्षण दिखाई दें तो जैविक उपाय अपनाएं। घर पर उगाई जाने वाली फसल में रासायनिक दवाओं के बजाय जैविक प्रबंधन बेहतर विकल्प माना जाता है।

अंत में बताते चले कि, कम लागत, सीमित जगह और बढ़ती बाजार मांग को देखते हुए सफेद हल्दी की खेती घर पर बागवानी करने वाले लोगों के साथ-साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक किसानों के लिए भी एक उपयोगी विकल्प बन सकती है। उचित देखभाल और सही प्रबंधन के साथ यह फसल घरेलू उपयोग के अलावा अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकती है।


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