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मुंबई।अमोल पाराशर की वेब सीरीज ‘ग्राम चिकित्सालय’ का दूसरा सीजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो चुका है। यह सीजन गांव की वास्तविकताओं को उजागर करता है, जहां ‘पकड़ौआ विवाह’ से लेकर अंधविश्वास तक की समस्याएं दिखाई गई हैं। पहले सीजन की सफलता के बाद यह नया सीजन डॉक्टर प्रभात की कहानी को आगे बढ़ाता है।

सीरीज की कहानी पहले सीजन के अंत से शुरू होती है। डॉक्टर प्रभात गांव वालों में अपना विश्वास बनाए रखने के लिए प्रयास करते हैं। गांव की राजनीति और प्रभावशाली लोगों के कारण उनके क्लिनिक में दवाइयां नहीं पहुंच पातीं। इस समस्या के समाधान के लिए वे डॉक्टर गार्गी द्वारा सुझाई गई एक प्रतियोगिता की तैयारी करते हैं। प्रतियोगिता जीतने पर दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकती है।

तैयारी के दौरान वे कई चुनौतियों का सामना करते हैं। पकड़ौआ विवाह, अन्य डॉक्टरों की चालें और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसी घटनाएं उन्हें प्रभावित करती हैं। सीरीज अंधविश्वास, झोलाछाप डॉक्टरों पर विश्वास, महिला स्वास्थ्य संबंधी हिचकिचाहट, नए डॉक्टर के प्रति जलन और घूसखोरी जैसी गांव की समस्याओं को सामने लाती है। अमोल पाराशर ने डॉक्टर प्रभात के शांत और समस्या समाधान वाले स्वभाव को प्रभावशाली तरीके से निभाया है। आकांक्षा रंजन कपूर ने डॉक्टर गार्गी का रोल अच्छे से किया है। अन्य कलाकारों ने भी गांव के विभिन्न किरदारों को विश्वसनीय बनाया है। ललितम तिवारी के निर्देशन में सीरीज को पांच एपिसोड में समेटा गया है, प्रत्येक एपिसोड औसतन 30 मिनट का है।

क्लाइमैक्स सीरीज का सबसे मजबूत हिस्सा बताया गया है, जो दर्शकों की आंखें खोल देता है। हालांकि म्यूजिक और रोमांस की कमी महसूस होती है। सिंपल और जमीन से जुड़ी कहानी पसंद करने वालों के लिए यह सीरीज देखने लायक है।

पहले सीजन से आगे बढ़ती है कहानी

दूसरे सीजन की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां पहला सीजन समाप्त हुआ था। डॉक्टर प्रभात अब गांव के लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश में जुटे हैं। हालांकि उनका सफर पहले से अधिक कठिन हो जाता है, क्योंकि गांव की राजनीति, स्थानीय प्रभावशाली लोगों का दबाव और स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियां उनके सामने नई चुनौतियां खड़ी करती हैं।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में दवाइयों की आपूर्ति बाधित हो जाती है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर प्रभात इस स्थिति को बदलने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं। इसी दौरान डॉक्टर गार्गी उन्हें एक प्रतियोगिता में भाग लेने की सलाह देती हैं। उम्मीद होती है कि यदि यह प्रतियोगिता जीत ली जाए तो अस्पताल को नियमित रूप से दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकती है।

‘ग्राम चिकित्सालय 2’ पहले सीजन की भावना को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक चुनौतियों को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है। अमोल पाराशर का संतुलित अभिनय, मजबूत कहानी और सामाजिक सरोकार इसे एक सार्थक वेब सीरीज बनाते हैं।हालांकि कुछ हिस्सों में कहानी की गति थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन इसका प्रभावशाली विषय, यथार्थवादी प्रस्तुति और बेहतरीन अभिनय इस कमी को काफी हद तक पूरा कर देते हैं।

रेटिंग: 4/5 स्टार

यदि आप मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देने वाली वेब सीरीज देखना पसंद करते हैं, तो ‘ग्राम चिकित्सालय 2’ आपकी वॉचलिस्ट में शामिल की जा सकती है।पंचायत जैसी सीरीज को दर्शकों का खूब प्यार मिला है और उसी की तरह एक और सीरीज बनाई गई ‘ग्राम चिकित्सालय’ जिसमें शहर का एक डॉक्टर सिटी लाइफ, बड़े हॉस्पिटल छोड़कर गांव में आता है और वहां के लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का जिम्मा उठाता है।

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