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नई दिल्ली।पारंपरिक फसलों से हटकर किसान अब मूंगफली की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। यह शॉर्ट-टर्म कमर्शियल फसल मात्र 4 महीने में पूरी लागत वसूल कर 12 गुना तक बंपर मुनाफा दे सकती है। बाजार में मूंगफली और इसके तेल की साल भर मांग बनी रहती है, जिससे दाम स्थिर रहते हैं। कम पानी और कम देखरेख में भी यह फसल अच्छी पैदावार देती है।

मूंगफली की खेती शुरू करने के लिए जून-जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त है। मानसून की शुरुआती बारिश पौधों के लिए फायदेमंद होती है। अच्छे जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी इसमें सर्वोत्तम मानी जाती है, जिसमें दानों की ग्रोथ अच्छी होती है। खेत तैयार करते समय गोबर की खाद या ऑर्गेनिक कंपोस्ट डालना चाहिए। बीजों को बोने से पहले फंगीसाइड से उपचारित करना जरूरी है ताकि शुरुआती दौर में बीमारियों से बचाव हो सके।

इस खेती की लागत एक एकड़ में काफी कम आती है। 120 दिनों में फसल पककर तैयार हो जाती है। हार्वेस्टिंग के बाद अच्छी क्वालिटी की मूंगफली बाजार में ऊंचे दामों पर बिकती है। यदि किसान इसे सीधे बेचने के बजाय तेल निकालकर या वैल्यू एडिशन करके बेचें तो कमाई और बढ़ सकती है।

जून-जुलाई है बुवाई का सबसे उपयुक्त समय

मूंगफली मुख्य रूप से खरीफ मौसम की फसल है। इसकी बुवाई के लिए जून और जुलाई का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। मानसून की शुरुआती बारिश मिट्टी में पर्याप्त नमी उपलब्ध कराती है, जिससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और पौधों का शुरुआती विकास तेजी से होता है।

समय पर बुवाई करने से पौधों को अनुकूल वातावरण मिलता है, जिससे उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है। यही वजह है कि कृषि विशेषज्ञ किसानों को मानसून शुरू होते ही खेत तैयार कर बुवाई करने की सलाह देते हैं।

कैसी होनी चाहिए मिट्टी

मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट (Sandy Loam) मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। इस प्रकार की मिट्टी में जल निकासी अच्छी होती है, जिससे पौधों की जड़ों में पानी नहीं ठहरता और दानों का विकास बेहतर होता है।

यदि खेत में पानी लंबे समय तक जमा रहता है तो फसल में सड़न और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए खेत का समतलीकरण और उचित जल निकासी व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करना आवश्यक है।

बदलते कृषि परिदृश्य में मूंगफली की खेती किसानों के लिए एक बेहतर व्यावसायिक विकल्प बनकर सामने आ रही है। कम अवधि में तैयार होने वाली यह फसल अपेक्षाकृत कम निवेश, कम पानी और स्थिर बाजार मांग के कारण आकर्षक मानी जाती है। यदि वैज्ञानिक तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज और उचित प्रबंधन के साथ खेती की जाए तथा वैल्यू एडिशन पर भी ध्यान दिया जाए, तो किसान अपनी आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं।

हालांकि, किसी भी फसल से होने वाला वास्तविक लाभ मौसम, उत्पादन, बाजार भाव, लागत और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना और बाजार की स्थिति का आकलन करना हमेशा लाभदायक रहता है।

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