नई दिल्ली।रसोई में लहसुन का तड़का न लगे तो खाने का स्वाद अधूरा सा लगता है। सुबह की चटपटी चटनी हो या दाल में तड़का, लहसुन हर भारतीय डिश का जायका दोगुना कर देता है। बाजार में मिलने वाले लहसुन में अक्सर केमिकल्स का डर रहता है और कभी-कभी इनके दाम भी आसमान छूने लगते हैं। ऐसे में घर पर ही एकदम ऑर्गेनिक और ताज़ा लहसुन उगाया जा सकता है। इसके लिए बड़े खेत या बगीचे की जरूरत नहीं है। बालकनी में रखे छोटे गमले या ग्रो बैग में भी इसे आसानी से उगाया जा सकता है।
बताते चले कि, घर पर लहसुन उगाने के लिए बाजार से महंगे बीज खरीदने की जरूरत नहीं है। रसोई में मौजूद लहसुन की बड़ी और स्वस्थ कलियाँ ही सबसे बेहतरीन बीज का काम करती हैं। सबसे पहले ड्रेनेज होल वाला गमला लें। फिर 60 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट और 10 प्रतिशत रेत मिलाकर हल्की व भुरभुरी मिट्टी तैयार करें। लहसुन की कलियों को छिलके समेत अलग करें और उनके नुकीले हिस्से को ऊपर की तरफ रखते हुए मिट्टी में लगभग दो इंच गहरा दबा दें। कलियों के बीच दो-तीन इंच की दूरी रखें ताकि गांठें अच्छी बन सकें।
जानकारी दे दें कि, लहसुन के पौधे को अच्छी ग्रोथ के लिए कम से कम चार से पांच घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए। इसलिए गमले को बालकनी या छत पर ऐसी जगह रखें जहाँ धूप आती हो। पानी देते समय मिट्टी में सिर्फ हल्की नमी बनाए रखें। गमले में पानी रुकना नहीं चाहिए, वरना कलियाँ सड़ सकती हैं। हफ्ते में एक-दो बार हल्का पानी देना ही काफी है। पौधा थोड़ा बड़ा हो जाए तो समय-समय पर गमले की हल्की गुड़ाई करते रहें ताकि जड़ों को हवा मिलती रहे।
यहां यह भी जानकारी देते चले कि, पौधा बड़ा होने पर इसकी ऊपर की हरी पत्तियों को काटकर पराठे, चटनी या सब्जियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हरी पत्तियों का स्वाद बहुत जबर्दस्त और खुशबूदार होता है। लहसुन की पूरी गांठ तैयार होने में लगभग चार से पांच महीने लगते हैं। जब पौधे की पत्तियाँ ऊपर से पीली पड़कर सूखने लगें तो समझ जाइए कि मिट्टी के नीचे गांठें पूरी तरह पक चुकी हैं। तब पौधे को उखाड़कर घर का उगाया हुआ ताज़ा और शुद्ध लहसुन इस्तेमाल किया जा सकता है।
