समाचार मिर्ची

शिमला। हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा, बाढ़ और भूस्खलन से 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं में 14 लोगों की मौत हो चुकी है।किन्नौर जिले में शुक्रवार तड़के करीब चार बजे तेज वर्षा के कारण चोलिंग में बाढ़ और मलबा आने से शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया। लगभग 30 मीटर हिस्से में मलबा जमा होने से राजमार्ग करीब 10 बजे तक बंद रहा। वहां से गुजर रही दो कारें मलबे की चपेट में आ गईं, हालांकि बड़ा हादसा टल गया। रिब्बा में बाढ़ से रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग भी बंद हो गया है।

यहां यह बता दें कि, प्रदेश में मानसून के प्रवेश से अब तक लगभग 16 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। तीन दिन में 30.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है। किन्नौर में वर्षा सामान्य से 423 प्रतिशत अधिक दर्ज हुई। लाहुल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई।स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से मौसम संबंधी घटनाओं में 12 लोगों की मौत हुई, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में दो अन्य लोगों की जान गई। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 12 जुलाई तक भारी वर्षा का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।

16 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान

प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार, मानसून के प्रवेश के बाद से अब तक राज्य को लगभग 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस नुकसान में सड़कें, पुल, सिंचाई योजनाएं, पेयजल व्यवस्था, बिजली ढांचा और अन्य सार्वजनिक संपत्तियां शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश का सिलसिला यदि इसी प्रकार जारी रहा तो आने वाले दिनों में नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है। कई क्षेत्रों में कृषि भूमि और बागवानी को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिसका विस्तृत आकलन बाद में किया जाएगा।

सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में हिमाचल प्रदेश में औसतन 30.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि इस बार मानसून अपेक्षा से अधिक सक्रिय बना हुआ है।

सबसे अधिक वर्षा किन्नौर जिले में रिकॉर्ड की गई, जहां सामान्य से 423 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा लाहुल-स्पीति को छोड़कर राज्य के लगभग सभी जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है, जिससे निचले इलाकों में खतरा बना हुआ है।

अंत में जानकारी दे दें कि, फिलहाल राज्य में राहत और पुनर्स्थापन कार्य जारी हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए अगले कुछ दिन हिमाचल प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं। ऐसे में प्रशासन, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों के बीच सतर्कता तथा समय पर सूचना का आदान-प्रदान संभावित नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version