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इस वर्ष होली की तिथि को लेकर लोगों में काफी भ्रम है कि यह 3 मार्च को मनाई जाएगी या 4 मार्च को। ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, होली का पर्व 4 मार्च 2026 को बुधवार को मनाया जाएगा। होलिका दहन 2 मार्च 2026 को सोमवार को किया जाएगा और इसका शुभ मुहूर्त शाम 6:22 बजे से 8:53 बजे तक रहेगा। यह मुहूर्त फाल्गुन पूर्णिमा के प्रदोष काल में पड़ता है और भद्रा पूंछ काल समाप्त होने के बाद रात 12:50 बजे से शुरू होने वाला माना गया है, जो शास्त्र सम्मत है।

3 मार्च 2026 को मंगलवार को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो दोपहर 3:21 बजे से शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक रहेगा और भारत में दृश्यमान होगा। इस ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। चंद्र ग्रहण और सूतक के कारण 3 मार्च को रंग वाली होली खेलना संभव नहीं है, इसलिए यह त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा।पंडितों और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह स्थिति दुर्लभ है और अधिकांश पंचांगों में इसी तरह की सलाह दी गई है। होली पिछले 6 वर्षों में सबसे जल्दी मनाई जा रही है, जो इस खास खगोलीय संयोग के कारण है।

रंगों की होली का सामाजिक संदेश

रंगों की होली, जिसे धुलंडी भी कहा जाता है, आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर खुशियां बांटते हैं और पुराने गिले-शिकवे भूलकर नए रिश्तों की शुरुआत करते हैं।

हालांकि इस वर्ष तिथियों में बदलाव के कारण लोगों को अपने कार्यक्रमों में थोड़ी सावधानी बरतनी होगी, लेकिन उत्साह और उमंग में कोई कमी नहीं आएगी।

कुल मिलाकर, होली 2026 इस बार पारंपरिक क्रम से थोड़ा अलग तरीके से मनाई जाएगी। 2 मार्च की रात 12:50 बजे के बाद होलिका दहन किया जाएगा, जबकि रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी। भद्रा काल और चंद्रग्रहण के कारण यह बदलाव आवश्यक माना गया है।ऐसे में श्रद्धालुओं और आम लोगों से अपील है कि वे सही समय और तिथि के अनुसार ही पर्व मनाएं और इस उत्सव के मूल संदेश—प्रेम, भाईचारे और सकारात्मकता—को आगे बढ़ाएं।

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