समाचार मिर्ची

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नई दिल्ली। शुक्रवार रात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ी खबर आई। ईरान ने बताया कि सीजफायर लागू रहने तक होर्मुज को खोला जा रहा है, जिससे कमर्शियल जहाजों को गुजरने की मंजूरी मिल गई। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

तेल की कीमतें पहले 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर थीं। होर्मुज खुलने की खबर के बाद ब्रेंट क्रूड वायदा 10.42 डॉलर या 10.48 फीसदी गिरकर 88.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। सत्र के दौरान यह 86.09 डॉलर के निचले स्तर तक गया। वहीं WTI क्रूड वायदा 11.48 डॉलर या 12.12 फीसदी गिरकर 83.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 80.56 डॉलर तक पहुंचा। हालांकि कारोबार बंद होने तक ब्रेंट क्रूड 90.38 डॉलर के स्तर पर था।

गैस की कीमतों पर भी असर पड़ा। एलएनजी की कीमत 2.624 डॉलर तक गिर गई, हालांकि बाद में यह 2.674 डॉलर पर पहुंच गई। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान अब होर्मुज कभी बंद नहीं करेगा और ईरान ने इस पर सहमति जताई।शनिवार सुबह ईरानी राष्ट्रपति मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि होर्मुज को अमेरिका के इशारे पर नहीं, बल्कि ईरान के नियमों के आधार पर संचालित किया जाएगा। उन्होंने ट्रंप के बयानों की आलोचना की और चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर प्रतिबंध बनाए रखता है तो होर्मुज बंद कर दिया जाएगा। इस नई खबर से सोमवार को तेल की कीमतों पर फिर असर पड़ने की संभावना है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 से 25 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी रास्ते पर निर्भर करता है।

यदि इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट आती है, तो वैश्विक बाजार में तुरंत असर देखने को मिलता है। तेल की कीमतों में उछाल आता है, जिससे महंगाई बढ़ती है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव पड़ता है। यही कारण है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हर छोटी-बड़ी खबर निवेशकों और सरकारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

तेल कीमतों का ऐतिहासिक विश्लेषण
इतिहास पर नजर डालें तो जब-जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा है, तब-तब तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। 1970 के दशक के तेल संकट से लेकर हाल के वर्षों में अमेरिका-ईरान तनाव तक, हर बार इस मार्ग की अस्थिरता ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है।

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