देश में हर्बल और कॉस्मेटिक उत्पादों की बढ़ती मांग अब किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता खोल रही है। पहले जहां किसान मुख्य रूप से पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान और मक्का की खेती पर निर्भर रहते थे, वहीं अब औषधीय और कॉस्मेटिक पौधों की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। एलोवेरा की खेती पहले से ही किसानों के बीच लाभकारी मानी जाती रही है, लेकिन अब इसके अलावा भी कई ऐसे पौधे हैं जिनकी बाजार में भारी मांग है और जिनसे किसान लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।
हर्बल और कॉस्मेटिक -इंडस्ट्री के तेजी से बढ़ने के साथ औषधीय तथा ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले पौधों की खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। बाजार में एलोवेरा के अलावा अन्य कॉस्मेटिक प्लांट्स की मांग भी बढ़ रही है। इनका उपयोग ब्यूटी प्रोडक्ट्स, आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल तेल, फेस पाउडर, लिपस्टिक, हेयर कलर और परफ्यूम बनाने में किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हर्बल प्रोडक्ट्स का कारोबार देश में तेजी से बढ़ रहा है। किसान पारंपरिक खेती के साथ इन पौधों की खेती करके अच्छी कमाई कर सकते हैं।
सिंदूर का पौधा -(रक्तबीज या कुमकुम ट्री) के बीजों से प्राकृतिक लाल रंग निकलता है, जिसका उपयोग सिंदूर, लिपस्टिक और फेस पाउडर में होता है। यह पौधा एक बार लगाने पर कई वर्षों तक उत्पादन देता है। तीन साल में फल आने लगते हैं और एक पौधे से डेढ़ किलो तक बीज मिल सकते हैं।
मेहंदी की खेती -कम पानी और कम उपजाऊ जमीन में भी की जा सकती है। एक बार लगाए गए पौधे 20-30 साल तक उत्पादन देते हैं। राजस्थान के पाली जिले की सोजत मेहंदी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। किसान सूखी पत्तियों का पाउडर बनाकर बेच सकते हैं।
केवड़ा- का उपयोग परफ्यूम, साबुन, हेयर ऑयल और लोशन में होता है। यह नमी वाले क्षेत्रों में अच्छा उगता है। लाख की खेती पलाश, बेर और कुसुम जैसे पेड़ों पर की जाती है, जिससे एक एकड़ में लाखों रुपये की कमाई संभव है।
अश्वगंधा -5-6 महीने में तैयार हो जाता है और कम पानी में बढ़ता है। तुलसी और सूरजमुखी का भी कॉस्मेटिक और हर्बल उत्पादों में उपयोग होता है। सूरजमुखी का तेल स्किन केयर प्रोडक्ट्स में काम आता है।
