तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान अमेरिका के साथ संभावित नए युद्ध के लिए तैयारी कर रहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार तेहरान को वॉशिंगटन पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। ईरान होर्मुज स्ट्रेट को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार मान रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी अधिकारी तीन मोर्चों पर काम कर रहे हैं। इनमें सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन और कूटनीति शामिल हैं। बातचीत का रास्ता खुला रखा गया है, लेकिन सेना और ईरान रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) हाई अलर्ट पर हैं।
ईरान होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। तेहरान इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने के लिए प्रमुख हथियार के रूप में देख रहा है।ईरानी नेतृत्व ने कहा है कि नए संघर्ष की स्थिति में अमेरिका के सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और संबंधित हित निशाने पर हो सकते हैं। कुछ दिन पहले IRGC ने चेतावनी दी थी कि किसी नए अमेरिकी हमले का जवाब पहले से ज्यादा हिंसक होगा और इसका असर मिडिल-ईस्ट से बाहर भी महसूस किया जाएगा।
तीन मोर्चों पर तैयारी कर रहा ईरान
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस समय तीन प्रमुख मोर्चों पर काम कर रहा है। पहला मोर्चा सैन्य तैयारी का है, दूसरा घरेलू समर्थन और तीसरा कूटनीतिक रणनीति का। ईरानी सरकार बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं करना चाहती, लेकिन साथ ही सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को संभावित हमलों और क्षेत्रीय तनाव से निपटने के लिए सक्रिय किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक कई संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाई गई है और सैन्य संसाधनों की समीक्षा की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह रणनीति केवल प्रत्यक्ष युद्ध की तैयारी नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और उसके सहयोगियों पर मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भी है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा प्रतिशत प्रतिदिन होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। ऐसे में यदि इस मार्ग में किसी प्रकार का सैन्य तनाव, अवरोध या संघर्ष होता है, तो उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ईरान लंबे समय से इस जलमार्ग को अपनी रणनीतिक ताकत के रूप में देखता रहा है। पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ने पर तेहरान कई बार संकेत दे चुका है कि जरूरत पड़ने पर वह इस मार्ग पर दबाव बना सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल दुनिया की नजर ईरान और अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बढ़ता तनाव बातचीत की दिशा में आगे बढ़ता है या फिर पश्चिम एशिया एक नए संकट की ओर बढ़ रहा है।
