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ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच महिलाओं की नई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनी की तस्वीरें जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगा रही हैं। यह दृश्य न केवल राजनीतिक सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती है बल्कि महिलाओं पर लगाए गए सामाजिक प्रतिबंधों को भी तोड़ने का प्रतीक माना जा रहा है।

प्रदर्शन की शुरुआत आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक अधिकारों की लड़ाई का रूप ले चुका है। ईरान में लंबे समय से महिलाओं पर हिजाब पहनने की अनिवार्यता और सार्वजनिक रूप से धूम्रपान करने पर सामाजिक दबाव रहा है। ऐसे में महिलाओं का खामेनी की तस्वीरें जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाना दोहरे विरोध का प्रतीक बन गया है—एक तरफ राजनीतिक सत्ता को चुनौती और दूसरी तरफ सामाजिक नियमों को तोड़ने का साहस।

इन तस्वीरों और वीडियो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान की सत्ता के लिए सबसे गंभीर चुनौती है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान सरकार की कठोर कार्रवाई पर चिंता जताई है, जबकि ईरानी प्रशासन इसे विदेशी साजिश करार दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अब तक सैकड़ों लोग इन प्रदर्शनों में अपनी जान गंवा चुके हैं और सरकार ने कई बार इंटरनेट शटडाउन लागू किया है ताकि विरोध की आवाज़ को दबाया जा सके।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों का प्रतीकात्मक महत्व बहुत गहरा है। सिगरेट जलाना स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों का प्रतीक माना जा रहा है, जबकि खामेनी की तस्वीर जलाना धार्मिक और राजनीतिक सत्ता को अस्वीकार करने का संकेत है। यह विरोध अब केवल स्थानीय नहीं रहा बल्कि वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

ईरान में महिलाओं द्वारा इस तरह का साहसिक कदम उठाना यह दर्शाता है कि आंदोलन अब केवल आर्थिक और राजनीतिक असंतोष तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों की लड़ाई भी बन चुका है। आने वाले दिनों में यह विरोध ईरान की सत्ता और समाज दोनों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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