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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में सिंगापुर पुलिस फोर्स (एसपीएफ) ने बड़ा बयान जारी किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच अभी जारी है और अब तक की पड़ताल में जुबीन गर्ग की मौत में किसी तरह की साजिश या फाउल प्ले का संदेह नहीं है।

सिंगापुर पुलिस के बयान में कहा गया है, “हम ऑनलाइन अफवाहों और भारतीय मीडिया में आई उन खबरों से अवगत हैं जिनमें भारत में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने चार लोगों पर जुबीन गर्ग की हत्या का आरोप लगाया है। लेकिन हमारी अब तक की जांच के आधार पर एसपीएफ को श्री गर्ग की मौत में फाउल प्ले का कोई संदेह नहीं है।”

पुलिस ने आगे कहा कि जांच सिंगापुर कोरोनर्स एक्ट 2010 के तहत की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद निष्कर्ष स्टेट कोरोनर को सौंपे जाएंगे, जो जनवरी और फरवरी 2026 में कोरोनर इंक्वायरी (सीआई) आयोजित करेंगे। यह इंक्वायरी मौत के कारण और परिस्थितियों का पता लगाने की तथ्य-आधारित प्रक्रिया है और इसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे।

एसपीएफ ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहें न फैलाएं और जांच में धैर्य रखें। “हम मामले की गहन और पेशेवर जांच करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संबंधित पक्षों से धैर्य और समझ की अपेक्षा करते हैं।”

गौरतलब है कि जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में समुद्र में तैराकी के दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में हुई थी। वे वहां चौथे नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करने गए थे।

दूसरी ओर, भारत में असम पुलिस की एसआईटी ने 12 दिसंबर को गुवाहटी की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें चार आरोपियों – इवेंट ऑर्गनाइजर श्यामकानु महंता, जुबीन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी और को-सिंगर अमृतप्रवा महंता – पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत हत्या का आरोप लगाया गया है। कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें जुबीन के चचेरे भाई संदीपन गर्ग और दो पीएसओ भी शामिल हैं। चार्जशीट 2,500 पेज की है, जबकि सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स 12,000 पेज के हैं। कोर्ट में अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।

एसआईटी ने 300 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं और अक्टूबर में सिंगापुर अधिकारियों से भी मुलाकात की थी। दोनों देशों में जांच अलग-अलग चल रही है, जिससे मामले में विरोधाभासी स्थिति बनी हुई है।

जुबीन गर्ग असम और पूर्वोत्तर के सांस्कृतिक आइकन थे, जिन्होंने बॉलीवुड में भी ‘या अली’ जैसे हिट गाने दिए थे। उनकी मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी।

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