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नई दिल्ली। केरल राज्य के नाम को आधिकारिक तौर पर ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने के केंद्र सरकार के फैसले ने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है। इस फैसले के महज एक दिन बाद ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नाम को बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग जोर पकड़ गई है। दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि ऐसा कदम भारत की राजधानी को उसकी प्राचीन सभ्यतागत और ऐतिहासिक जड़ों से पुनः जोड़ेगा।

गौर करने वाली बात यह हैं कि, केरल के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया 24 फरवरी 2026 को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पूरी हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह फैसला नई पीएमओ बिल्डिंग ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया। केरल विधानसभा ने जून 2024 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था कि राज्य का नाम मलयालम भाषा में ‘केरलम’ है, जो उसकी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करता है। केंद्र सरकार ने इस मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि राज्य की जनभावनाओं और भाषाई अस्मिता को सम्मान देने में कोई देरी नहीं की जाएगी।

वही अंत में सांसद ने सुझाव दिया कि, दिल्ली विधानसभा में भी इस नाम परिवर्तन के लिए प्रस्ताव पारित किया जाए। इसके अलावा, पुराना किला या किसी उपयुक्त स्थान पर पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएं, ताकि शहर की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित किया जा सके। उन्होंने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम ‘इंद्रप्रस्थ जंक्शन’ और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम ‘इंद्रप्रस्थ एयरपोर्ट’ करने का भी प्रस्ताव रखा है।

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