नई दिल्ली: केतन अग्रवाल मर्डर केस में मुख्य आरोपी सिया के प्रेमी चेतन चौधरी की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस या संबंधित एजेंसी गेट एनालिसिस (Gait Analysis) का सहारा लेगी। यह फोरेंसिक जांच में तेजी से लोकप्रिय हो रही तकनीक है। जब चेहरा स्पष्ट न हो, मास्क लगा हो या कैमरे की क्वालिटी खराब हो, तब भी व्यक्ति की चाल के आधार पर पहचान की जा सकती है।गेट एनालिसिस मनुष्य की चलने की पैटर्न का अध्ययन है। इसमें एक कदम की लंबाई, कदमों की गति, शरीर की मुद्रा, हाथों का हिलना, कूल्हों की गति, पंजों का प्लेसमेंट और घुटनों का एंगल जैसे 20 से ज्यादा पैरामीटर शामिल होते हैं। हर व्यक्ति की चाल 90-95 प्रतिशत अनोखी होती है। ब्रिटेन की शोध के अनुसार, गेट पैटर्न जन्म के बाद विकसित होता है और 15-20 साल की उम्र तक स्थिर हो जाता है।
क्या है गेट एनालिसिस?
गेट एनालिसिस का अर्थ है किसी व्यक्ति के चलने के तरीके यानी गेट पैटर्न का वैज्ञानिक अध्ययन। इसमें यह देखा जाता है कि व्यक्ति चलते समय अपने पैरों, हाथों और शरीर का उपयोग किस प्रकार करता है। विशेषज्ञ केवल सामान्य चाल नहीं देखते, बल्कि कई तकनीकी मानकों का विश्लेषण करते हैं।
इस प्रक्रिया में एक कदम की लंबाई, चलने की गति, शरीर का संतुलन, हाथों के हिलने का तरीका, कूल्हों की गति, पैरों के पंजों का जमीन पर पड़ने का ढंग, घुटनों का कोण तथा शरीर की समग्र मुद्रा सहित 20 से अधिक मानकों का अध्ययन किया जाता है। इन सभी तत्वों को मिलाकर व्यक्ति की चाल का एक विशिष्ट पैटर्न तैयार किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति की चाल में कई ऐसे गुण होते हैं जो उसे दूसरों से अलग बनाते हैं। उपलब्ध शोधों के अनुसार, किसी व्यक्ति का गेट पैटर्न जन्म के बाद धीरे-धीरे विकसित होता है और लगभग 15 से 20 वर्ष की आयु तक अपेक्षाकृत स्थिर हो जाता है। यही कारण है कि फोरेंसिक जांच में इसे पहचान के सहायक साधन के रूप में देखा जाता है।
केतन अग्रवाल हत्याकांड में क्यों है अहम?
जांच से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में जांच एजेंसियों के पास ऐसा सीसीटीवी फुटेज मौजूद है जिसमें संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन उसका चेहरा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसी स्थिति में केवल चेहरे के आधार पर पहचान करना कठिन हो सकता है।
यही वजह है कि जांच एजेंसी संदिग्ध की चाल का विश्लेषण कर उसे पुराने वीडियो या अन्य उपलब्ध रिकॉर्डिंग से मिलाने की प्रक्रिया अपना सकती है। यदि चाल के पैटर्न में पर्याप्त समानता मिलती है, तो यह जांच की दिशा तय करने में सहायक जानकारी प्रदान कर सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों, डिजिटल प्रमाणों, गवाहों के बयान और जांच के समग्र परिणामों के आधार पर ही निकाला जाता है।
डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के साथ गेट एनालिसिस जैसी तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। बेहतर कैमरे, उन्नत वीडियो विश्लेषण सॉफ्टवेयर और एआई आधारित मॉडलिंग ने इस क्षेत्र को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाया है।केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में भी यदि गेट एनालिसिस का उपयोग किया जाता है, तो इसका उद्देश्य उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज से अतिरिक्त वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करना होगा। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए सभी साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।
