नई दिल्ली। मौजूदा समय में किसान धान और गेहूं के अलावा मोटे अनाजों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। मक्का (मका) इनमें सबसे प्रमुख फसल बन चुकी है, क्योंकि यह कम समय में तैयार हो जाती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के दौर में मक्का की खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। जायद सीजन की बुवाई का समय नजदीक आ रहा है, ऐसे में किसान उन्नत बीजों की तलाश में हैं। राष्ट्रीय बीज निगम (National Seeds Corporation – NSC) ने किसानों की सुविधा के लिए मक्का की हाइब्रिड किस्म ‘सुपर-82’ का बीज ऑनलाइन उपलब्ध कराया है। यह बीज सस्ते दाम पर मिल रहा है और घर बैठे ऑर्डर करके मंगवाया जा सकता है। आइए जानते हैं इस बीज की खासियत, कीमत और ऑनलाइन खरीदारी की पूरी प्रक्रिया।
मक्का की खेती क्यों बढ़ रही है?
भारत में मक्का की खेती खरीफ, रबी और जायद तीनों सीजन में की जाती है। यह फसल महज 3 से 4 महीने में तैयार हो जाती है, जिससे किसान कई फसलें ले सकते हैं। मक्का का उत्पादन अन्य अनाजों से अधिक होता है और यह सूखा सहन करने में सक्षम है। मोटे अनाजों को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं से किसानों को अच्छी कीमत भी मिल रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु जैसे राज्यों में मक्का की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। लेकिन सफलता के लिए सही उन्नत बीज का चयन जरूरी है। गलत बीज से उपज कम और क्वालिटी प्रभावित होती है। इसलिए किसानों को प्रमाणित और हाइब्रिड बीज अपनाने चाहिए।
इस संबंध मे जानकारी दे दें कि, राष्ट्रीय बीज निगम ने सुपर-82 के 4 किलोग्राम पैकेट पर 6% की विशेष छूट दी है। मूल कीमत से छूट के बाद यह पैकेट मात्र 1512 रुपये में उपलब्ध है। यह कीमत काफी आकर्षक है, क्योंकि बाजार में अन्य हाइब्रिड बीज महंगे मिलते हैं। कुछ समय पहले ऑफर में यह 1000 रुपये में भी उपलब्ध था, लेकिन वर्तमान में 1512 रुपये की दर है। यह बीज प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाला है, इसलिए किसानों के लिए फायदेमंद सौदा है।
बुवाई से पहले क्या करें?
मक्का की अच्छी फसल के लिए खेत तैयार करना जरूरी है:
- खेत में 2-3 बार मोल्डबोर्ड हल से जुताई करें।
- मिट्टी भुरभुरी बनाने के लिए रोटावेटर का इस्तेमाल करें।
- गोबर खाद या कंपोस्ट 8-10 टन प्रति हेक्टेयर डालें।
- बीज उपचार जरूरी है – थाइरम या कार्बेन्डाजिम जैसे फंगीसाइड से उपचारित करें ताकि बीमारी न लगे।
- बुवाई लाइन में करें, बीज दर 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर रखें।
चलते चलते बता दें कि, सुपर-82 जैसी उन्नत किस्म अपनाने से किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि बाजार में अच्छी कीमत भी पा सकते हैं। मक्का का उपयोग पशु चारा, खाद्य, इंडस्ट्री और बायोफ्यूल में होता है। सरकारी योजनाओं से सब्सिडी भी मिल सकती है। राष्ट्रीय बीज निगम जैसे संस्थान प्रमाणित बीज उपलब्ध कराकर किसानों की मदद कर रहे हैं। अगर आप मक्का की खेती करने की सोच रहे हैं, तो सुपर-82 बीज ऑनलाइन ऑर्डर करें। यह सस्ता, गुणवत्ता वाला और उच्च उपज देने वाला है। अधिक जानकारी के लिए NSC की वेबसाइट या हेल्पलाइन से संपर्क करें।
