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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम आने के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और कार्यवाहक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 5 मई को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हम चुनाव हारे नहीं हैं, बल्कि हमें जानबूझकर हराया गया है। ममता ने स्पष्ट किया कि उनके इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं है और वे लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी।ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनकी 100 सीटें लूट ली गईं और 90 लाख वोट काट दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर उन्हें हराने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल किया। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग खलनायक बन गया है और ईवीएम में मतदान के बाद भी 80-90 प्रतिशत चार्ज रहने जैसे सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले उनके लोगों को गिरफ्तार किया गया, छापेमारी की गई और आईपीएस-आईएएस अधिकारियों को बदला गया। ममता ने दावा किया कि एसआईआर के नाम पर 90 लाख नाम हटाए गए, जबकि कोर्ट जाने पर 32 लाख नाम जोड़े गए। उन्होंने कहा कि हम पूरी मशीनरी के खिलाफ लड़े और यह भाजपा व चुनाव आयोग के बीच सांठगांठ थी।ममता बनर्जी ने इंडी गठबंधन के नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन द्वारा समर्थन दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे इंडी गठबंधन को और मजबूत करेंगी।

फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या इस मामले में कोई जांच या कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है। वहीं, विपक्षी दलों का समर्थन ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक ताकत का स्रोत बन सकता है, जिससे वे अपनी लड़ाई को और मजबूती से आगे बढ़ा सकें।

इस बीच, आम जनता की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं और वे यह जानना चाहती हैं कि क्या इन आरोपों में सच्चाई है या यह महज राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है। आने वाले समय में ही इस सवाल का जवाब स्पष्ट हो पाएगा।

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