समाचार मिर्ची

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मेरठ किसान ने की आत्मदाह की कोशिश लोगों ने बचाई जान किसानों की मुशकिले बढती ही जा रही है सरकार किसानो को लिए कई सुविधाए दे रही है लेकिन कई किसान इससे वंचित रह जाते है उन तक लाभ पहुंच नही पाता हैं इस कारण उन्हें दुख पहुंचता है ।मोदी सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चलाती है जो किसान व वंचित रह जाते हैं सरकार की योजनाओं

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद मार्मिक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मवाना तहसील में एक किसान ने सिस्टम से तंग आकर आत्मदाह की कोशिश की। बताया जा रहा है कि किसान पिछले छह महीनों से अपनी जमीन के दाखिल-खारिज (mutation) को लेकर तहसील के चक्कर काट रहा था, लेकिन अधिकारियों की बेरुखी और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हताशा की इस स्थिति में किसान ने अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की, जिसे वहां मौजूद लोगों ने समय रहते रोक लिया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि किसान रोते हुए कहता है:
“मैं किसान हूं, मेरी जमीन पर कब्जा हो गया है, मैं छह महीने से दौड़ रहा हूं, कोई सुनता नहीं… अब मैं क्या करूं…”

यह वीडियो उत्तर प्रदेश कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है, जिसने सरकार और प्रशासन पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि किसानों की समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर नहीं है और गांवों में हो रही प्रशासनिक लापरवाहियों से किसान मानसिक रूप से टूट चुके हैं।

छह महीने से दर-दर भटक रहा था किसान

किसान का नाम अभी स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वह पिछले छह महीनों से अपनी जमीन के दाखिल-खारिज (mutation) के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा था। बार-बार प्रार्थनापत्र देने और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद न तो उसकी सुनवाई हुई और न ही कोई कार्यवाही। आखिरकार, थक हार कर उसने आत्मदाह का रास्ता चुन लिया।

मवाना तहसील परिसर में अचानक उस समय अफरा-तफरी मच गई जब किसान ने जेब से पेट्रोल की बोतल निकालकर खुद पर डालना शुरू कर दिया। वहां मौजूद लोगों और कुछ कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया और आत्मदाह से रोक लिया। हालांकि मानसिक स्थिति बिगड़ चुकी थी और वह जोर-जोर से रोता रहा, अपनी कहानी सुनाता रहा।

प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही

अब तक इस मामले पर मेरठ जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद तहसील स्तर पर आंतरिक जांच शुरू होने की बात कही जा रही है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है — मवाना तहसील में दाखिल-खारिज, नामांतरण, वरासत आदि मामलों में कई महीने तक फाइलें धूल फांकती रहती हैं।

आम जनता की प्रतिक्रिया: “अब तो व्यवस्था ही बदलनी चाहिए”

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखकर आम नागरिकों की प्रतिक्रिया भी तीव्र रही। कई यूजर्स ने लिखा, “जब एक किसान अपने अधिकार के लिए जान देने को मजबूर हो जाए, तो सोचिए हमारा सिस्टम कितना संवेदनहीन हो गया है।” वहीं, कुछ यूजर्स ने यह भी लिखा कि यदि मौके पर लोग नहीं होते, तो एक और किसान प्रशासन की उदासीनता की बलि चढ़ गया होता।

आम जनता की प्रतिक्रिया: “अब तो व्यवस्था ही बदलनी चाहिए”

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखकर आम नागरिकों की प्रतिक्रिया भी तीव्र रही। कई यूजर्स ने लिखा, “जब एक किसान अपने अधिकार के लिए जान देने को मजबूर हो जाए, तो सोचिए हमारा सिस्टम कितना संवेदनहीन हो गया है।” वहीं, कुछ यूजर्स ने यह भी लिखा कि यदि मौके पर लोग नहीं होते, तो एक और किसान प्रशासन की उदासीनता की बलि चढ़ गया होता।

समाधान की दिशा में क्या हो?
किसानों के भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता अब और भी अधिक बढ़ गई है। सरकार को चाहिए कि:

तहसील स्तर पर ऑनलाइन म्यूटेशन प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए

हर दाखिल-खारिज प्रकरण की एक समयसीमा तय की जाए

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो

किसानों को कानूनी सलाह और सहायता के लिए हेल्पडेस्क की स्थापना की जाए

मानसिक रूप से पीड़ित किसानों के लिए काउंसलिंग और सहायता सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं

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