नई दिल्ली। आजकल की खेती सिर्फ परंपरागत तरीकों तक सीमित नहीं रही है बल्कि यह काफी मॉडर्न हो चुकी है। अगर पुरानी खेती जारी रखी जाए तो मुनाफा कम ही मिलता है। इसलिए एग्रोफॉरेस्ट्री और मिक्स्ड फार्मिंग जैसे इनोवेटिव मॉडल्स को अपनाने का समय आ गया है। यह तरीका बंजर या कम उपजाऊ जमीन की भी कायापलट कर सकता है और कमाई के नए रास्ते खोलता है।मिक्स्ड फार्मिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि एक ही जमीन से दो अलग-अलग तरह की इनकम मिलती है। खेत में एक तरफ फलदार पेड़ लगाए जा सकते हैं तो दूसरी तरफ नीचे बची खाली जगह में न्यूट्रिशियस हरा चारा उगाया जा सकता है। जमीन एक ही रहेगी लेकिन जेब में आने वाला पैसा डबल हो जाएगा। फलदार पेड़ जैसे आम, अमरूद, नींबू या अनार लॉन्ग-टर्म एसेट की तरह काम करते हैं। शुरुआत के कुछ समय बाद जब ये पेड़ फल देना शुरू करते हैं तो मार्केट में इनकी डिमांड बनी रहती है। हर सीजन में फलों की बिकवाली से भारी-भरकम एकमुश्त कैश फ्लो मिलता है।
हम यहां आपको जानकारी दे दें कि, पेड़ों को बड़े होने और फल देने में थोड़ा समय लगता है लेकिन हरा चारा तुरंत और रेगुलर रिटर्न देता है। खाली पड़ी जगह में बरसीम, नेपियर या नैपियर घास जैसी फसलें उगाकर डेली या वीकली बेसिस पर कमाई की जा सकती है। लोकल डेयरी फार्मर्स और पशुपालकों के बीच हरे चारे की डिमांड हमेशा बनी रहती है। अगर खुद के मवेशी या डेयरी फार्म हैं तो बाजार से महंगा चारा खरीदने का खर्चा खत्म हो जाएगा। फ्रेश और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर हरा चारा खाने से पशु ज्यादा सेहतमंद रहेंगे और दूध उत्पादन भी बढ़ जाएगा।
इस संबंध में जानकारी दें दें कि, फलों के पेड़ और हरे चारे का कॉम्बिनेशन खेत की सॉइल हेल्थ के लिए नेचुरल टॉनिक का काम करता है। पेड़ की गहराई तक जाने वाली जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकती हैं और जमीन में नमी बनाए रखती हैं। हरा चारा मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक तत्वों की मात्रा को नेचुरल तरीके से बढ़ा देता है। इससे जमीन की उर्वरता बरकरार रहती है और महंगे केमिकल फर्टिलाइजर्स पर खर्च नहीं करना पड़ता। मौसम की मार और क्लाइमेट चेंज से पारंपरिक फसलें बर्बाद हो सकती हैं लेकिन मिक्स्ड फार्मिंग इस रिस्क से सुरक्षा देती है। अगर मौसम फलों की फसल को नुकसान पहुंचाए तो भी हरा चारा सुरक्षित रहता है।
इस मॉडल में अलग से कोई बड़ी जमीन या एक्स्ट्रा रिसोर्सेस नहीं खरीदने पड़ते। पानी, खाद और लेबर का इस्तेमाल दोनों फसलों के लिए एक साथ ही हो जाता है। कम लागत में शानदार आउटपुट मिलना इस मॉडर्न टेक्निक की सबसे बड़ी खासियत है जो हर छोटे-बड़े किसान के बजट में फिट बैठती है।
