नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में बदलाव की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है, जिसमें नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है और कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है।मंत्रिमंडल विस्तार का मुख्य फोकस उन राज्यों पर रहेगा जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब सहित सात राज्यों में चुनाव प्रस्तावित हैं। यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में साल के शुरू में तथा हिमाचल प्रदेश और गुजरात में साल के अंत में चुनाव होने हैं। ऐसे में इन राज्यों से प्रतिनिधित्व बढ़ाने की संभावना है।
यूपी से फिलहाल केंद्र में 10 मंत्री हैं, जिसमें प्रधानमंत्री भी शामिल हैं। पश्चिमी यूपी, ओबीसी और दलित समुदाय से नए चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है। पंजाब में रवनीत सिंह बिट्टू वर्तमान में एकमात्र मंत्री हैं, जिनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया है। पंजाब से दो-तीन मंत्रियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।कुछ मंत्रियों की छुट्टी संभव है। पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं, जॉर्ज कुरियन ने इस्तीफा दे दिया है। फिलहाल 72 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 81 बन सकते हैं। आम आदमी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और टीएमसी के बागी सांसदों को भी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं। मॉनसून सत्र से पहले विस्तार की संभावना है।
चुनावी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर रहेगा जोर
सूत्रों के अनुसार, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में उन राज्यों को प्राथमिकता दी जा सकती है जहां जल्द चुनाव होने वाले हैं। चुनावी राज्यों से अधिक प्रतिनिधित्व देकर भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है।
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश को लेकर चर्चाएं सबसे अधिक हैं। देश के सबसे बड़े राज्य से वर्तमान में प्रधानमंत्री सहित कुल 10 केंद्रीय मंत्री हैं। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से नए चेहरों को अवसर दिया जा सकता है। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति (दलित) समुदायों से भी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो इसे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा जा सकता है।
मानसून सत्र से पहले हो सकता है फैसला
संसद का मानसून सत्र निकट है और राजनीतिक हलकों में यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि यदि मंत्रिमंडल विस्तार होना है तो यह सत्र शुरू होने से पहले किया जा सकता है। इससे नए मंत्री संसद सत्र के दौरान अपनी जिम्मेदारियां संभाल सकेंगे और सरकार के विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार की तिथि, नए मंत्रियों के नाम और संभावित फेरबदल को लेकर अभी तक सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल सामने आ रही सभी जानकारियों को राजनीतिक चर्चाओं और संभावित अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल देश की राजनीतिक नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यदि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार होता है, तो यह केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और एनडीए की राजनीतिक रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाएगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि किन नए चेहरों को केंद्र सरकार में जगह मिलती है और किन मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है।
