नई दिल्ली। बरसात के मौसम में पौधों को नई जिंदगी मिलती है, लेकिन इस समय की गई छोटी सी गलती उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। कई लोग मानसून में हर दिन पौधों को पानी देने लगते हैं, जबकि कुछ पौधों को इतनी जरूरत नहीं होती। ज्यादा पानी मिलने पर इनकी जड़ें सड़ने लगती हैं, पत्तियां पीली होकर गिरने लगती हैं और तना भी गलने लगता है। ऐसे में चार पौधों को बरसात में पानी से बचाना जरूरी है।
इस कड़ी में हम आपको बता दें कि, कैक्टस और सकुलेंट्स मूल रूप से रेगिस्तानी पौधे हैं। इनकी मोटी पत्तियों और तनों में पहले से पानी जमा रहता है, इसलिए इन्हें कम पानी और सूखी मिट्टी की जरूरत होती है। मानसून में इन्हें बिल्कुल पानी न दें और ऐसी जगह शिफ्ट करें जहां छांव हो तथा सीधे बारिश का पानी न गिरे। मिट्टी में लगातार पानी भरा रहने पर ये तीन से चार दिनों में सड़कर काले पड़ सकते हैं। अडेनियम या डेजर्ट रोज के मोटे तने में हफ्तों का पानी स्टोर होता है। बरसात में इसकी जड़ों के सड़ने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए इसे छत के नीचे रखें और मिट्टी पूरी तरह सूखने तक पानी न दें।
इन 4 पौधों को भूलकर भी न दें ज्यादा पानी-
1. कैक्टस और सकुलेंट्स
कैक्टस और सकुलेंट्स ऐसे पौधे हैं जो प्राकृतिक रूप से रेगिस्तानी इलाकों में उगते हैं। इनकी खासियत यह है कि ये अपनी मोटी पत्तियों और तनों में लंबे समय तक पानी संग्रहित करके रखते हैं। इसी वजह से इन्हें बार-बार पानी देने की आवश्यकता नहीं होती।
बरसात के मौसम में यदि इन पौधों को नियमित रूप से पानी दिया जाए या लगातार बारिश का पानी इन पर गिरता रहे, तो मिट्टी लंबे समय तक गीली रहती है। इससे जड़ों में सड़न शुरू हो सकती है और कुछ ही दिनों में पौधे काले पड़कर खराब होने लगते हैं।
2. अडेनियम (डेजर्ट रोज)
अडेनियम, जिसे डेजर्ट रोज भी कहा जाता है, अपनी खूबसूरत फूलों और मोटे तने के लिए जाना जाता है। इसका तना काफी मात्रा में पानी संग्रहित करता है, इसलिए इसे बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती।
मानसून के दौरान इस पौधे की सबसे बड़ी समस्या जड़ों का सड़ना होती है। यदि गमले में पानी जमा हो जाए या लगातार नमी बनी रहे तो पौधे का विकास रुक सकता है और वह धीरे-धीरे खराब होने लगता है।
3. एलोवेरा
एलोवेरा लगभग हर घर में पाया जाने वाला लोकप्रिय औषधीय पौधा है। इसकी मोटी पत्तियों में जेल के रूप में पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद रहता है। यही कारण है कि यह कम पानी में भी आसानी से जीवित रह सकता है।
बरसात के मौसम में वातावरण की नमी और गीली मिट्टी के कारण एलोवेरा को अतिरिक्त पानी देने की जरूरत नहीं होती। यदि लगातार पानी दिया जाए तो इसकी जड़ें कमजोर हो सकती हैं और पत्तियां पीली या मुलायम होने लगती हैं।
4. स्नेक प्लांट (सांप का पौधा)
स्नेक प्लांट को सबसे कम देखभाल वाले पौधों में गिना जाता है। यह हवा को शुद्ध करने वाले लोकप्रिय इनडोर पौधों में शामिल है और बिना पानी के भी लंबे समय तक हरा-भरा रह सकता है।
मानसून में इस पौधे को अधिक पानी देना सबसे आम गलती मानी जाती है। जड़ों के आसपास पानी जमा होने पर पौधा नीचे से गलना शुरू कर देता है और धीरे-धीरे उसकी पत्तियां भी खराब होने लगती हैं।
आखिर में जानकारी देते चले कि, एलोवेरा लगभग हर घर में मिल जाता है। इसकी पत्तियों में जेल पानी ही है और बरसात में नमी के कारण मिट्टी लंबे समय तक गीली रहती है। इसमें अलग से पानी डालने की गलती न करें। जब पत्तियां पीली या ढीली पड़ने लगें, तभी पानी दें। सांप का पौधा या स्नेक प्लांट हवा साफ करने वाले पौधों में गिना जाता है। यह बिना पानी के भी महीनों तक हरा-भरा रह सकता है। मानसून में इसे पानी की जरूरत नहीं होती। घर के अंदर रखने पर महीने में सिर्फ एक या दो बार पानी दें, क्योंकि जड़ों के पास पानी जमा होने पर यह नीचे से गलने लगता है।
