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नई दिल्ली। गर्मियों में बाजार में उपलब्ध ज्यादातर आमों को जल्दी पकाने के लिए खतरनाक केमिकल्स और कार्बाइड का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे न सिर्फ सेहत को नुकसान पहुंचता है बल्कि आमों का असली स्वाद और प्राकृतिक खुशबू भी खत्म हो जाती है।किसान भाई बिना किसी केमिकल के आमों को प्राकृतिक तरीके से पका सकते हैं। कच्चे आमों को अखबार या मोटे कागज में एक-एक करके अच्छी तरह लपेटें। फिर इन्हें लकड़ी के बॉक्स, गत्ते के डिब्बे या जूट की खाली बोरी में व्यवस्थित करके रख दें। इस प्रक्रिया में आम से निकलने वाली नेचुरल एथिलीन गैस अंदर ही लॉक हो जाती है, जो आमों को दो से तीन दिनों में समान रूप से पका देती है।

यह भी बता दें कि, भारतीय ग्रामीण इलाकों में सदियों से इस्तेमाल होने वाला एक और तरीका चावल के ड्रम का है। कच्चे आमों को चावल के दानों के बीच पूरी तरह दबाकर रख दें। इससे बनने वाली प्राकृतिक गर्मी और अंधेरे माहौल से आम जल्दी और अच्छी रंगत के साथ पक जाते हैं।इसके अलावा सूखी घास या पुआल की मोटी परत बिछाकर उसके ऊपर आम रखें। इन्हें अच्छी तरह ढककर कमरे को बंद कर दें, जिससे गर्म वातावरण तैयार हो जाता है। इन देसी तरीकों से आम बिना नेचुरल मिठास खोए सुरक्षित रूप से पक जाते हैं।

अखबार और कागज से पकाने का तरीका

विशेषज्ञ बताते हैं कि कच्चे आमों को पकाने के लिए सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है उन्हें अखबार या मोटे कागज में लपेटकर रखना। इसके लिए प्रत्येक आम को अलग-अलग अच्छी तरह कागज में लपेटा जाता है। इसके बाद इन्हें लकड़ी के बॉक्स, गत्ते के डिब्बे या जूट की बोरी में व्यवस्थित तरीके से रखा जाता है।

इस प्रक्रिया में आम से निकलने वाली प्राकृतिक एथिलीन गैस बाहर नहीं निकल पाती और बंद वातावरण में जमा हो जाती है। यही गैस फलों को प्राकृतिक रूप से पकाने में मदद करती है। सामान्यतः दो से तीन दिनों के भीतर आम समान रूप से पक जाते हैं। इस तरीके में किसी भी प्रकार के केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती और फल का स्वाद भी बरकरार रहता है।

किसानों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं देसी उपाय

देसी तकनीकों से आम पकाने में लागत भी कम आती है। किसानों को महंगे रसायन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और फल की गुणवत्ता बेहतर रहने से बाजार में अच्छी कीमत भी मिल सकती है। इसके अलावा यह तरीका पर्यावरण और उपभोक्ताओं दोनों के लिए सुरक्षित माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को प्राकृतिक फल पकाने की तकनीकों के बारे में अधिक जागरूक किया जाए तो केमिकलयुक्त फलों की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। इससे लोगों को सुरक्षित और स्वादिष्ट फल मिलेंगे तथा किसानों की आय में भी सुधार हो सकता है।

गर्मियों के इस मौसम में किसानों और व्यापारियों के लिए जरूरी है कि वे आम पकाने के सुरक्षित और प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं। इससे न केवल उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि भारतीय आमों की गुणवत्ता और पहचान भी बनी रहेगी।

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