समाचार मिर्ची

नई दिल्ली: देश में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और उर्वरकों की सप्लाई को किसी भी वैश्विक संकट से सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदन के जवाब में सरकार ने खुलासा किया है कि उर्वरकों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बदलाव या किसी क्षेत्रीय संघर्ष का भारतीय किसानों तक खाद की उपलब्धता पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

आरटीआई जवाब के अनुसार, सरकार कच्चे माल, जरूरी सामग्री और तैयार खाद, तीनों की सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है। आयात के बेहतर और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। घरेलू स्तर पर भी सप्लाई चेन को सुधारा जा रहा है ताकि वैश्विक अस्थिरता का भारत पर असर न पड़े।

सरकार की रणनीति दोतरफा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीद के तरीकों को मजबूत किया जा रहा है तो दूसरी ओर देश के भीतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को सुधारना, समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना और बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ाना शामिल है। ईरान-अमेरिका युद्ध से हुई सप्लाई चेन की दिक्कतों को देखते हुए यह कदम उठाए गए हैं।

हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर उत्पन्न चुनौतियों ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। ईरान-अमेरिका तनाव और उससे जुड़े घटनाक्रमों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कई बार व्यवधान देखने को मिला। ऐसे हालात में भारत ने पहले से तैयारी करते हुए खाद की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

कच्चे माल से लेकर तैयार खाद तक पूरी सप्लाई चेन पर फोकस

आरटीआई के जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकार केवल तैयार उर्वरकों के आयात पर ही ध्यान नहीं दे रही, बल्कि कच्चे माल, आवश्यक रसायनों और तैयार खाद—तीनों स्तरों पर सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है।

इसके तहत विभिन्न देशों से आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही ऐसे विकल्प भी विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम हो सके। इससे भविष्य में यदि किसी देश में उत्पादन प्रभावित होता है या निर्यात पर प्रतिबंध लगता है, तब भी भारत की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी।

कुल मिलाकर, आरटीआई के जरिए सामने आई जानकारी से स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। आयात के स्रोतों में विविधता, वैकल्पिक व्यापारिक मार्ग, मजबूत घरेलू लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को सुदृढ़ बनाने जैसे कदम कृषि क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो भविष्य में वैश्विक संकटों के बावजूद देश के किसानों को खाद की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version