नई दिल्ली।देश में कई किसान खेती के लिए केमिकल खाद का इस्तेमाल करते हैं, जिससे खर्चा बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी प्रभावित होती है। नीम से बनी जैविक खाद इस समस्या का प्राकृतिक विकल्प है। नीम फसलों को कीड़ों से बचाने में मदद करता है और घर पर तैयार करने से महंगे उत्पादों पर होने वाला खर्च बचाया जा सकता है।नीम की खाद बनाने के लिए ताजा गोबर और नीम की ढेर सारी पत्तियों की जरूरत होती है। जमीन में छोटा गड्ढा खोदकर सबसे नीचे गोबर की एक परत बिछाएं। उसके ऊपर नीम की पत्तियों को फैलाकर दबा दें। इसी तरह गोबर और नीम की पत्तियों की परतें लगातार बिछाते जाएं। लेयरिंग पूरी होने के बाद गड्ढे को 3 से 6 महीने तक छोड़ दें। इस दौरान समय-समय पर पानी का छिड़काव करके नमी बनाए रखें। कुछ महीनों बाद जैविक खाद तैयार हो जाएगी।
खाद के अलावा नीम की पत्तियों से कीटनाशक स्प्रे भी बनाया जा सकता है। इसके लिए नीम की ताजी पत्तियों को साफ पानी में डालकर अच्छी तरह उबालें। पानी का रंग बदलने पर ठंडा होने दें और छानकर स्प्रे बोतल में भर लें। इस तरल का पौधों पर छिड़काव करने से कीटों का प्रकोप कम होता है और पौधों को पोषक तत्व मिलते हैं।
क्यों खास है नीम से बनी जैविक खाद?
नीम भारतीय कृषि परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसकी पत्तियां, बीज और अन्य भाग लंबे समय से खेती में विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं। नीम की पत्तियों से तैयार जैविक खाद मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में मदद करती है। इससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और पौधों की जड़ों को पोषक तत्व मिलने में आसानी होती है।
इसके अलावा नीम में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो कई प्रकार के कीटों के प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। यही कारण है कि जैविक खेती अपनाने वाले किसान नीम आधारित उत्पादों का अधिक उपयोग करते हैं।
घर पर कैसे तैयार करें नीम की जैविक खाद?
नीम की जैविक खाद तैयार करना अपेक्षाकृत आसान प्रक्रिया है और इसके लिए अधिक खर्च भी नहीं आता। यदि खेत या आसपास नीम के पेड़ उपलब्ध हों, तो किसान आसानी से इसकी पत्तियों का उपयोग कर सकते हैं।
खाद तैयार करने के लिए सबसे पहले एक छोटा गड्ढा खोद लें। इसके बाद निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जा सकती है—
- गड्ढे के सबसे नीचे ताजा गोबर की एक परत बिछाएं।
- इसके ऊपर नीम की ताजी या सूखी पत्तियों की एक परत फैलाएं।
- पत्तियों को हल्का दबाकर फिर गोबर की दूसरी परत डालें।
- इसी प्रकार गोबर और नीम की पत्तियों की परतें बारी-बारी से लगाते रहें।
- पूरी लेयरिंग होने के बाद गड्ढे को ढक दें।
इस मिश्रण को लगभग 3 से 6 महीने तक प्राकृतिक रूप से सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस दौरान समय-समय पर हल्का पानी छिड़कते रहना चाहिए ताकि नमी बनी रहे और जैविक अपघटन की प्रक्रिया सही ढंग से चलती रहे।निर्धारित समय के बाद तैयार खाद का रंग गहरा भूरा या काला हो जाता है और उसमें मिट्टी जैसी गंध आने लगती है। यह संकेत होता है कि खाद खेत में उपयोग के लिए तैयार है।
महंगे उर्वरकों और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों के बीच नीम आधारित जैविक खाद और प्राकृतिक स्प्रे किसानों के लिए एक किफायती विकल्प बन सकते हैं। यदि खेत में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग किया जाए तो खेती का खर्च कम करने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत को भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
नीम की पत्तियों और गोबर जैसी आसानी से उपलब्ध सामग्री से तैयार यह जैविक खाद छोटे और मध्यम किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग न केवल टिकाऊ खेती को बढ़ावा देता है, बल्कि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ कृषि प्रणाली की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
