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नई दिल्ली।हरियाली तीज उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। हर साल श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन यह पर्व आता है, इसलिए इसे सावन तीज भी कहा जाता है। विवाहित महिलाएं इस दिन पति की दीर्घायु की कामना में व्रत रखती हैं और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की चाह में यह व्रत करती हैं।

इस कड़ी में हम आपको बता दें कि, इस पर्व पर निभाई जाने वाली एक प्रमुख रस्म सिंधारे की है। सदियों से हिंदू धर्म में शादीशुदा बेटियों के घर मायके से सिंधारा भेजने की परंपरा चली आ रही है। सिंधारा में कपड़े, मिठाइयां और सुहाग का सामान भेजा जाता है। इसमें आने वाली मिठाइयों को ससुराल में करीबी रिश्तेदारों को दिया जाता है। सिंधारा में आने वाली चीजों को सुहागिन महिलाओं को भी दिया जाता है।सिंधारा को मायके की तरफ से आने वाला विशेष उपहार माना जाता है। इसमें शादीशुदा बेटी के लिए सौभाग्य का आशीर्वाद छिपा रहता है। बेटी को सोलह श्रृंगार उपहार में दिए जाते हैं। यह मायके वालों की तरफ से बेटी के सौभाग्य के आशीर्वाद का प्रतीक है। शादीशुदा बेटी को श्रृंगार की सामग्री के साथ सिंधारा देना एक पुण्य कर्म माना जाता है, जो मायके और ससुराल दोनों की समृद्धि के लिए जरूरी होता है। इससे वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।

हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है?

हरियाली तीज सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इसी वजह से इसे कई स्थानों पर सावन तीज भी कहा जाता है। उत्तर भारत के कई राज्यों में इस पर्व की विशेष धूम देखने को मिलती है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई क्षेत्रों में महिलाएं पारंपरिक तरीके से तीज का उत्सव मनाती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी कथा के आधार पर विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और पति की लंबी आयु की कामना से व्रत और पूजा करती हैं।

क्या होता है सिंधारा?

हरियाली तीज से जुड़ी सबसे चर्चित पारिवारिक परंपराओं में सिंधारा भेजना शामिल है। शादी के बाद बेटी के ससुराल में मायके से सिंधारा भेजने की परंपरा कई परिवारों में आज भी निभाई जाती है।

सिंधारे में बेटी के लिए नए कपड़े, मिठाइयां, श्रृंगार सामग्री और सुहाग से जुड़ी वस्तुएं भेजी जाती हैं। कुछ परिवारों में मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, काजल, चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री भी शामिल की जाती है। इसकी सामग्री परिवार की परंपरा, आर्थिक स्थिति और स्थानीय रीति-रिवाज के अनुसार अलग हो सकती है।

कुल मिलाकर, हरियाली तीज का सिंधारा मायके की ओर से विवाहित बेटी के लिए स्नेह, सम्मान और शुभकामनाओं का प्रतीक माना जाता है। कपड़े, मिठाई और सुहाग सामग्री जैसे उपहारों के पीछे बेटी के सुखी जीवन की कामना जुड़ी होती है। अलग-अलग राज्यों और परिवारों में इसकी रस्में भले ही अलग हों, लेकिन इस परंपरा का मूल भाव परिवार के रिश्तों को मजबूत करना और त्योहार की खुशी को साझा करना है।

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