जम्मू। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने NEET-UG पेपर लीक विवाद के विरोध में जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों तथा विधानसभा स्तर पर कैंडल मार्च निकालने का फैसला किया है। इन मार्चों के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जाएगी तथा पेपर लीक से कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले 21 अभ्यर्थियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान तारिक हमीद करा ने रविवार को बिश्नाह में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश में 90 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं की जाती और केवल दोबारा परीक्षा कराकर मामले को समाप्त कर दिया जाता है।
कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी जम्मू शहरी के पूर्व मंत्री योगेश साहनी और जिला कांग्रेस कमेटी जम्मू ग्रामीण के अध्यक्ष नीरज कुंदन ने भी भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत में शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों पर प्रस्तुति दी गई और कोटा में राहुल गांधी की छात्रों से बातचीत का वीडियो दिखाया गया। कार्यक्रम के अंत में NEET अभ्यर्थियों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
तारिक हमीद करा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। कांग्रेस का यह अभियान राहुल गांधी के नेतृत्व में देशभर में चलाया जा रहा है ताकि छात्र अपनी समस्याएं सामने रख सकें।
बिश्नाह में आयोजित हुआ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद करा ने रविवार को जम्मू के बिश्नाह क्षेत्र में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में इस आंदोलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा कमजोर हुआ है।
अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में शिक्षा का अत्यधिक व्यवसायीकरण हो गया है, जिसका सीधा असर प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं तो उनका मनोबल भी प्रभावित होता है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आते हैं तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित मंत्रालय की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केवल जांच के आदेश देना या दोबारा परीक्षा आयोजित कराना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि परीक्षा प्रणाली में ऐसे स्थायी सुधार किए जाने चाहिए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल, कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि उसका आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं तथा परीक्षा प्रणाली को लेकर भविष्य में कौन से सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
