प्लांट केयर टिप्स: गार्डन में नमी बनाए रखने के लिए की जाने वाली मल्चिंग जरूरत से ज्यादा हो जाए तो यह भारी नुकसान पहुंचा सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक हद से ज्यादा मल्चिंग से पौधे मर सकते हैं।गार्डन को सुंदर और पौधों को स्वस्थ रखने के लिए मल्चिंग एक लोकप्रिय और प्रभावी तरीका माना जाता है। यह मिट्टी की नमी बनाए रखने और खरपतवार को रोकने में बेहतर काम करती है। हालांकि, किसी भी चीज की अति नुकसानदायक होती है और यह नियम मल्चिंग पर भी लागू होता है।
आजकल कई लोग जोश में आकर पौधों के आसपास जरूरत से ज्यादा मल्चिंग कर देते हैं, जिसे एक्सपर्ट्स ओवर-मल्चिंग कहते हैं। पौधों की भलाई के लिए की गई यह मेहनत कई बार उनके लिए जानलेवा साबित हो जाती है। हद से ज्यादा मल्चिंग से मिट्टी को हवा नहीं मिल पाती और धीरे-धीरे पौधों का दम घुटने लगता है।
क्या होती है मल्चिंग?
मल्चिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पौधों के आसपास मिट्टी की सतह को सूखी पत्तियों, भूसे, लकड़ी के बुरादे, नारियल के छिलके, घास या जैविक पदार्थों से ढक दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मिट्टी की नमी बनाए रखना, खरपतवार को रोकना और मिट्टी के तापमान को संतुलित रखना होता है।
गर्मियों और सूखे मौसम में मल्चिंग मिट्टी से पानी के तेजी से वाष्पीकरण को रोकती है। इससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती रहती है और बार-बार पानी देने की जरूरत कम हो जाती है। यही वजह है कि घरेलू बागवानी से लेकर खेती तक में मल्चिंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
ओवर-मल्चिंग क्यों बन रही है समस्या?
गार्डनिंग के प्रति बढ़ते उत्साह में कई लोग पौधों के आसपास जरूरत से ज्यादा मल्च बिछा देते हैं। विशेषज्ञ इस स्थिति को “ओवर-मल्चिंग” कहते हैं। देखने में यह तरीका पौधों की अतिरिक्त सुरक्षा जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में यह उनकी जड़ों के लिए खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब मल्च की परत बहुत मोटी हो जाती है, तब मिट्टी तक पर्याप्त हवा नहीं पहुंच पाती। पौधों की जड़ों को भी सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। यदि जड़ों तक हवा का प्रवाह रुक जाए तो उनकी वृद्धि प्रभावित होने लगती है।
धीरे-धीरे पौधों की जड़ें कमजोर पड़ जाती हैं और पौधे की पत्तियां पीली होने लगती हैं। कई मामलों में पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और वे सूखने लगते हैं।
