Skip to main content

समाचार मिर्ची

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लाइसेंस रद्द किए जाने के कुछ महीनों बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। आरबीआई ने मंगलवार को इस कानूनी फैसले की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने एसबीआई के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर गिरिकुमार एम नायर को पेटीएम पेमेंट्स बैंक का ऑफिशियल लिक्विडेटर नियुक्त किया है। नायर 8 जुलाई 2026 से बैंक के बोर्ड की सभी पावर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यहां यह जानकारी दे दें कि, आरबीआई ने बयान में बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 के आदेश और 22 जुलाई 2026 के आदेश के साथ यह निर्देश जारी किया है। यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 और कंपनीज एक्ट, 2013 के प्रावधानों के तहत की गई है। कोर्ट ने लिक्विडेटर को बैंकिंग और कंपनीज एक्ट के तहत तय सभी अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि. आरबीआई ने लगातार नियमों का पालन न करने की वजह से अप्रैल 2026 में पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। उस समय आरबीआई ने कहा था कि बैंक का कामकाज डिपॉजिटर्स के हितों के खिलाफ चलाया जा रहा है। लाइसेंस रद्द करने के साथ ही आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया था कि वह बैंक को बंद कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करेगा। ऑफिशियल लिक्विडेटर कोर्ट द्वारा नियुक्त वह अधिकारी होता है जो कंपनी या बैंक की संपत्ति को कब्जे में लेकर उसकी देनदारियों का हिसाब लगाता है और जमाकर्ताओं व कर्जदाताओं के पैसों का निपटारा करता है।


क्यों रद्द हुआ था बैंक का लाइसेंस?

आरबीआई ने अप्रैल 2026 में पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने उस समय कहा था कि बैंक लगातार नियामकीय मानकों और निर्देशों का पालन करने में विफल रहा है।

आरबीआई के बयान के अनुसार, बैंक का संचालन जमाकर्ताओं (Depositors) के हितों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसी आधार पर बैंकिंग लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक को औपचारिक रूप से बंद करने के लिए अदालत में याचिका दायर की जाएगी।

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद वही प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जिसकी जानकारी आरबीआई ने पहले ही दी थी।

हाईकोर्ट ने जारी किया बंद करने का आदेश

आरबीआई के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 और 22 जुलाई 2026 को जारी अपने आदेशों के तहत पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को बंद करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 तथा कंपनीज एक्ट, 2013 के संबंधित प्रावधानों के तहत की है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बैंक के परिसमापन की प्रक्रिया कानून के अनुरूप पूरी की जाएगी और इसके लिए नियुक्त अधिकारी को आवश्यक अधिकार प्रदान किए गए हैं। इस निर्णय के साथ बैंक के बोर्ड के अधिकार भी प्रभावी रूप से समाप्त हो गए हैं और आगे की कार्रवाई नियुक्त अधिकारी की निगरानी में होगी।

अंतमे यहां यह बताना अति आवश्दियक है कि, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पेटीएम पेमेंट्स बैंक के परिसमापन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से आगे बढ़ेगी। नियुक्त ऑफिशियल लिक्विडेटर बैंक की संपत्तियों, देनदारियों और अन्य वित्तीय मामलों की समीक्षा करेंगे तथा कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करेंगे।आरबीआई के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 और कंपनीज एक्ट, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप संचालित होगी। परिसमापन से जुड़े सभी निर्णय अदालत की निगरानी और लागू कानूनों के अनुसार लिए जाएंगे।यह घटनाक्रम भारत के बैंकिंग और फिनटेक क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन के महत्व को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय संस्थानों के लिए नियामकीय नियमों का पालन, पारदर्शी संचालन और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा किसी भी बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version