नई दिल्ली। देश के किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan) आज सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक बन चुकी है। इस योजना के तहत देशभर के करोड़ों किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। अब तक इस योजना की 21 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और करोड़ों किसानों को इसका लाभ मिल चुका है।
क्या है PM Kisan योजना और इसका उद्देश्य?
साल 2019 में शुरू की गई PM Kisan योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। खेती से जुड़े खर्च जैसे बीज, खाद, सिंचाई आदि में मदद के लिए सरकार सीधे किसानों के बैंक खाते में पैसा भेजती है।
यह योजना Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली पर आधारित है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है। खासकर बिहार जैसे राज्यों में लाखों किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
क्या बिना Farmer ID अटक सकती है किस्त?
सरकारी स्तर पर अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक अंतिम आदेश नहीं आया है कि बिना Farmer ID के 22वीं किस्त पूरी तरह रोक दी जाएगी। लेकिन विभागीय संकेतों और अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में Farmer ID को अनिवार्य किया जा सकता है।
इसका मतलब साफ है कि अगर आपने अभी तक Farmer Registry ID नहीं बनवाई है, तो आने वाले समय में आपकी किस्त अटकने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए समय रहते इस प्रक्रिया को पूरा करना ही बेहतर है।
Farmer Registry ID क्यों जरूरी है?
Farmer ID एक तरह की डिजिटल पहचान है, जिसमें किसान की जमीन, फसल, बैंक डिटेल और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज होती है। इसके कई फायदे हैं:
- फर्जी लाभार्थियों की पहचान आसानी से हो सकेगी
- सही किसानों तक योजना का लाभ पहुंचेगा
- सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा
- किसानों का एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार होगा
- भविष्य की योजनाओं का लाभ तेजी से मिल सकेगा
जानकारी दे दें कि, PM Kisan योजना देश के किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, लेकिन इसके लाभ को सुचारू रूप से पाने के लिए सरकार समय-समय पर नियमों में बदलाव कर रही है। Farmer Registry ID भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।हालांकि 22वीं किस्त को लेकर Farmer ID को लेकर अभी अंतिम आदेश स्पष्ट नहीं है, लेकिन भविष्य में इसे अनिवार्य किया जा सकता है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते रजिस्ट्रेशन कर लें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।कुल मिलाकर, यह कदम किसानों के हित में ही है, जिससे सही और पात्र लाभार्थियों तक ही योजना का लाभ पहुंचेगा और कृषि व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकेगा।
