नई दिल्ली। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत केंद्र सरकार पात्र किसान परिवारों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है, जो 2000 रुपये की तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। योजना का सबसे अहम नियम जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा है। सरकार पात्र किसानों की पहचान सरकारी राजस्व रिकॉर्ड जैसे खसरा-खतौनी के आधार पर ही करती है। जिस व्यक्ति के नाम पर खेती योग्य जमीन दर्ज होगी, लाभ सिर्फ उसी को मिलेगा।
यहां यह जानकारी दें कि, गांवों में कई किसान दूसरों के खेतों को बटाई पर लेकर फसल उगाते हैं और उपज का हिस्सा देते हैं। ये बटाईदार किसान बीज, खाद, सिंचाई और कटाई का जिम्मा संभालते हैं, लेकिन जमीन का कानूनी मालिकाना हक मूल भू-स्वामी के पास रहता है। राजस्व रिकॉर्ड में बटाईदार का नाम दर्ज न होने के कारण मौजूदा नियमों के तहत वे पीएम किसान योजना के दायरे में नहीं आते और उन्हें किस्तों का लाभ नहीं मिल पाता।
आखिर में हम आपको बता दें कि, अगर किसी किसान के अपने नाम पर थोड़ी-बहुत कृषि योग्य भूमि दर्ज है, तो वह अपनी निजी जमीन के कागजात के आधार पर पीएम किसान पोर्टल पर आवेदन कर सकता है और योजना की अगली किस्त नियमानुसार मिल सकती है। पूरी तरह भूमिहीन किसान इसमें शामिल नहीं हो सकते। अगली किस्त पाने के लिए बैंक खाता आधार से लिंक होना, डीबीटी चालू होना, ई-केवाईसी पूरा करना और भू-सत्यापन कराना जरूरी है। अधूरी औपचारिकताओं से किस्त अटक सकती है।योजना की पिछली 23वीं किस्त 20 जून को जारी हुई थी। चार महीने के अंतराल के हिसाब से अगली 24वीं किस्त अक्टूबर में जारी की जा सकती है। सटीक तारीख का ऐलान केंद्र सरकार पोर्टल पर करेगी और स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है।
