नई दिल्ली ।अनार कई लोगों को पसंद होता है। कई लोग इसका जूस पीना पसंद करते हैं और सेहत के लिए भी अनार काफी फायदेमंद होता है। अनार की खेती हमेशा फायदे का सौदा बनी रहती है। अगर लगता है कि अनार उगाने के लिए बड़ा बगीचा या खेत होना जरूरी है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। थोड़ी सी जगह और सही देखभाल के साथ घर की छत, बालकनी या आंगन में भी अनार का पौधा आसानी से लगाया जा सकता है। अनार ऐसा फलदार पौधा है जो भारतीय मौसम में अच्छी तरह ग्रो करता है और ज्यादा देखभाल भी नहीं मांगता। अगर शुरुआत सही तरीके से की जाए तो कुछ समय बाद यही पौधा फूल और फल दोनों देने लगता है। बीज से पौधा तैयार करने के बजाय अच्छी नर्सरी से हेल्दी सैपलिंग खरीदना बेहतर है क्योंकि इससे फल जल्दी मिलने के चांस रहते हैं। सही गमला, अच्छी मिट्टी, भरपूर धूप और नियमित देखभाल इस पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए सबसे जरूरी चीजें हैं।
यह जानना सबसे जरुरी हैं कि, घर पर अनार का पौधा लगाने के लिए बड़ा गमला, प्लास्टिक का ड्रम या मजबूत बाल्टी चुनें। इससे जड़ों को फैलने के लिए ठीक-ठाक जगह मिल जाती है। गमले के नीचे पानी निकलने के लिए कई छेद जरूर होने चाहिए वरना जड़ों में पानी भरने से पौधा खराब हो सकता है। छेद के ऊपर जाली लगाने से मिट्टी बाहर नहीं निकलती और ड्रेनेज भी बना रहता है। पॉटिंग मिक्स तैयार करने के लिए गार्डन की मिट्टी में कोकोपीट, गोबर की सड़ी खाद या होम कंपोस्ट और वर्मीकंपोस्ट बराबर मात्रा में मिलाएं। इसमें थोड़ा नीम खली और बोन मील भी मिलाया जा सकता है। गमले के सबसे नीचे सूखे पत्तों की लेयर बिछाएं और उसके ऊपर मिट्टी की लेयर डालें। इसी तरह दो से तीन लेयर तैयार करके गमले को कुछ दिन छोड़ दें। इसके बाद नर्सरी से लाई गई हेल्दी सैपलिंग लगाएं। इससे पौधे की शुरुआत मजबूत होती है और जड़ों की ग्रोथ भी बेहतर रहती है।
इस कड़ी मे जानकारी देते चले कि, अनार का पौधा धूप को बहुत पसंद करता है इसलिए इसे ऐसी जगह रखें जहां रोज कम से कम छह से आठ घंटे अच्छी धूप मिले। पौधा लगाने के शुरुआती दिनों में रोज हल्का पानी दें लेकिन इतना नहीं कि मिट्टी में पानी जमा हो जाए। मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए ऊपर सूखे पत्ते या नारियल की भूसी बिछाई जा सकती है। समय-समय पर ऑर्गेनिक कंपोस्ट या गोबर की सड़ी खाद डालते रहें ताकि पौधे को लगातार पोषण मिलता रहे। अगर पौधे पर कीड़ों का हमला दिखाई दे तो नीम के तेल का घोल बनाकर स्प्रे किया जा सकता है। इससे बिना केमिकल के कीटों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। धूप, पानी और रेगुलर पोषण मिलने पर पौधा तेजी से ग्रो करता है और कुछ समय बाद फूल भी आने लगते हैं।
अंत मे बताते चले कि, अनार के पौधे को सिर्फ लगाना ही काफी नहीं होता। समय-समय पर उसकी प्रूनिंग भी जरूरी होती है। जब पौधा करीब दो से तीन फीट ऊंचा हो जाए तो उसकी ऊपर की बढ़त हल्की काट दें। इससे नई शाखाएं निकलती हैं और आगे चलकर ज्यादा फूल और फल आने में मदद मिलती है। कई बार पौधे पर फूल आते हैं लेकिन फल बनने से पहले ही गिर जाते हैं। ऐसे में पौधे की नियमित देखभाल और सही पोषण देना जरूरी होता है। सूखी या कमजोर टहनियों को हटाते रहें जिससे पौधे की एनर्जी नई ग्रोथ पर लगे। अगर धूप, पानी, खाद सही मिलता रहा और प्रूनिंग सही होती रहे तो गमले में लगा अनार का पौधा भी अच्छी क्वालिटी के फल दे सकता है। थोड़ी सी मेहनत और धैर्य के साथ घर में ही ताजा और ऑर्गेनिक अनार का आनंद लिया जा सकता है।
