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नई दिल्ली। बिहार समेत उत्तर भारत में 42-44 डिग्री सेल्सियस तापमान और लू के प्रकोप के बीच खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों को धान की नर्सरी बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस भीषण गर्मी में सही तरीके से नर्सरी न बनाई गई तो पूरे सीजन की पैदावार प्रभावित हो सकती है।

धान के अंकुरण के लिए आदर्श तापमान जरूरी

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, धान के बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए दिन का तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 15 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। इस तापमान में बीज तेजी से अंकुरित होते हैं और पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं। लेकिन वर्तमान में कई राज्यों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर चल रहा है।

अत्यधिक गर्मी की वजह से बीजों की अंकुरण क्षमता कम हो सकती है। कई बार पौधे पीले पड़ने लगते हैं या शुरुआती अवस्था में ही सूख जाते हैं। तेज धूप के कारण नर्सरी की मिट्टी में नमी तेजी से खत्म होती है, जिससे पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। यही कारण है कि कृषि विभाग और वैज्ञानिक लगातार किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी के बीच किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना होगा। सही समय पर नर्सरी, उचित सिंचाई, बीज उपचार और छाया प्रबंधन जैसी तकनीकों से किसान इस चुनौती का सामना कर सकते हैं।

देश में धान प्रमुख खाद्यान्न फसल है और करोड़ों किसानों की आय इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में मौजूदा गर्मी और मौसम की चुनौती के बीच कृषि विभाग द्वारा जारी सलाह किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति और मौसम के अनुसार खेती करें, तो प्रचंड गर्मी के बावजूद अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है।

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