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समाचार मिर्ची

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। प्रधान ने NEET-UG पेपर लीक और छात्रों के लंबे विरोध प्रदर्शनों के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा। तो क्या यह मान लेना चाहिए कि सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है कि वो बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है। अगर मान भी लें कि वो ऐसी मंशा रखती है तो फिर इतनी देर क्यों कि… सवाल कई खड़े होते हैं मगर सच्चाई यही है कि सरकार यह समझ चुकी थी कि युवा ताकत को कमतर आंकने की गलती करना सही नहीं होगा। निकट भविष्य की चिंता ने बीजेपी को ऐसा फैसला लेने पर मजबूर किया है ये पूरा देश देख रहा है। इन सब के बावजूद फिर वही सवाल है कि क्या सिर्फ चेहरा बदलने से हालात सुधर जाएंगे।

हम मानते हैं कि कर्नाटक के धारवाड़ से लगातार सांसद रहे प्रहलाद जोशी भारतीय राजनीति में संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते हैं। वे संसदीय कार्य मंत्री, कोयला और खनन मंत्री तथा उपभोक्ता मामले और ऊर्जा मंत्रालय का नेतृत्व कर चुके हैं। उनकी छवि एक सधे हुए प्रशासक की है, जो कठिन परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखते हैं। वहीं अब शिक्षा मंत्रालय उनके पास है, जो वर्तमान समय में सबसे संवेदनशील मंत्रालयों में से एक बन चुका है। तो क्या वाकई युवाओं के इस संघर्ष से नई भविष्य की पटकथा लिखी जाएगी या फिर हालात वैसे ही रहने वाले हैं।

भविष्य में क्या होगा ये कोई नहीं जानता है मगर इतना तो है कि NEET-UG पेपर लीक ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों का जो भरोसा तोड़ दिया था औऱ लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया था 36 दिन तक चले आंदोलन ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया। अब जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। National Testing Agency (NTA) का पुनर्गठन, डिजिटल निगरानी और सख्त कानून लागू करना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को जमीन पर उतारना, उच्च शिक्षा में सुधार और कौशल विकास को बढ़ावा देना भी उनके एजेंडे में शामिल होगा।

क्या चेहरा बदलने से हालात बदलेंगे?

सिर्फ मंत्री बदलने से हालात नहीं बदलते। असली सुधार तभी होंगे जब शिक्षा मंत्रालय संरचनात्मक बदलाव करे। छात्रों का भरोसा तभी लौटेगा जब सरकार ठोस कदम उठाएगी—जैसे परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी निगरानी, स्वतंत्र परीक्षा नियामक की स्थापना और पारदर्शी व्यवस्था। प्रहलाद जोशी का अनुभव उन्हें एक सक्षम प्रशासक बनाता है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय की असली परीक्षा अब शुरू होगी।

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