समाचार मिर्ची

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नई दिल्ली।भारत में चल रहे ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस समिट को ‘अव्यवस्थित पीआर तमाशा’ करार दिया है, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने समिट की प्रशंसा की है। थरूर ने कहा कि समिट के शुरुआती दिन बेहद सफल रहे और बड़े आयोजनों में कुछ गड़बड़ियां होना स्वाभाविक है। यह टिप्पणी राहुल गांधी के बयान के एक दिन बाद आई है, जिससे कांग्रेस पार्टी के भीतर अलग-अलग रुख दिखाई दे रहा है।

इस कड़ी में बता दें कि, ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन के तहत एक प्रमुख वैश्विक आयोजन है, जो 16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मानव-केंद्रित एआई विकास, समावेशी विकास और सतत भविष्य को आकार देना है। समिट में विश्व भर के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, तकनीकी दिग्गज और विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में मानव-केंद्रित एआई विजन पेश किया, जिसमें भारत को एआई के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की बात कही गई। समिट में थीमेटिक पैविलियन, प्रदर्शनियां और चर्चाएं शामिल हैं, जहां एआई के सामाजिक प्रभाव पर जोर दिया जा रहा है।

यहां यह भी बता दें कि, राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए समिट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा, “भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, एआई समिट एक अव्यवस्थित पीआर तमाशा बन गया है – भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध, चीनी उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।” राहुल गांधी का यह बयान समिट में एक विवादास्पद घटना के बाद आया, जिसमें गलगोटियास यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित ‘ओरियन’ नामक रोबोटिक डॉग को चीनी कंपनी यूनिट्री का गो2 मॉडल बताकर भारतीय नवाचार के रूप में पेश करने का आरोप लगा।

जानकारी दे दें कि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी समिट की आलोचना की है। पार्टी ने दावा किया कि आयोजन में संगठनात्मक खामियां जैसे खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी, पानी की कमी, भीड़भाड़ और अन्य लॉजिस्टिकल समस्याएं सामने आईं। कांग्रेस ने इसे करदाताओं के पैसे की बर्बादी और सरकार की प्राथमिकताओं में कमी का प्रमाण बताया। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि समिट को दिखावा बनाने के बजाय वास्तविक एआई नीतियों पर फोकस करना चाहिए था।

यहां गौर करने वाली बात हैं कि, थरूर के बयान से कांग्रेस में मतभेद उजागर हुए हैं। पार्टी के एक धड़े ने समिट को राजनीतिक हथियार बनाया, जबकि थरूर ने इसे राष्ट्रीय हित में देखा। भाजपा ने राहुल गांधी की टिप्पणियों पर पलटवार किया और कहा कि जिन्हें बुद्धि की कमी है, उन्हें एआई पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। भाजपा नेताओं ने समिट को सफल बताया और कहा कि यह भारत की एआई महत्वाकांक्षाओं का प्रमाण है।

बताते चले कि, यह विवाद एआई के बढ़ते महत्व को दर्शाता है, जहां तकनीकी प्रगति के साथ राजनीतिक नजरिए भी जुड़ गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार दिखावे में ज्यादा रुचि रखती है, जबकि थरूर जैसे नेता वैश्विक भागीदारी को महत्व देते हैं। समिट के अंतिम दिनों में देखना होगा कि क्या यह विवाद भारत की एआई छवि पर असर डालता है या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है।एआई समिट जैसे आयोजन भारत के लिए अवसर हैं, जहां प्रतिभा, डेटा और नीतियों का संतुलन जरूरी है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में संगठनात्मक सुधार होंगे और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित पर फोकस होगा।

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