नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने कन्फर्म टिकट कैंसिल करने और रिफंड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे से कम समय पहले कन्फर्म टिकट रद्द करने पर यात्री को कोई रिफंड नहीं मिलेगा। पहले यह समय सीमा 4 घंटे थी, जिसे अब बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया गया है। साथ ही चार्ट तैयार करने का समय भी 4 घंटे से बढ़ाकर 8 घंटे पहले कर दिया गया है।
नए नियमों के अनुसार रिफंड की राशि कैंसिलेशन के समय पर निर्भर करेगी। ट्रेन छूटने से 72 घंटे या उससे अधिक पहले टिकट रद्द करने पर प्रति यात्री तय रद्दीकरण शुल्क काटकर शेष पूरा रिफंड मिलेगा। 72 से 24 घंटे के बीच रद्द करने पर टिकट राशि का 25 प्रतिशत कटौती होगी। 24 से 8 घंटे के बीच रद्द करने पर 50 प्रतिशत राशि कटेगी, जबकि 8 घंटे से कम समय में कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा।
ये बदलाव 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के दौरान चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इनका ऐलान किया। उन्होंने बताया कि यह सुधार ‘52 हफ्तों में 52 सुधार’ अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, खाली सीटों का बेहतर उपयोग करना और प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को अधिक कन्फर्म टिकट उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा कुछ सुविधाएं भी दी गई हैं। ट्रेन रद्द होने या तीन घंटे से अधिक देरी होने पर पूरा रिफंड मिलेगा। वेटिंग टिकट चार्ट तैयार होने के बाद भी कन्फर्म न होने पर स्वतः रद्द हो जाएगा और पूरा पैसा वापस मिलेगा। काउंटर टिकट अब देश के किसी भी स्टेशन से कैंसिल कराया जा सकता है। ई-टिकट कैंसिल होते ही रिफंड प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं, हालांकि बदलने के बाद पुराने स्टेशन से यात्रा नहीं की जा सकेगी।
