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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। ट्रस्ट की पुरानी बैठकों और मंदिर परिसर के आयोजनों की तस्वीरों में गोपाल राव लगभग हर अहम बैठक और कार्यक्रम में सक्रिय रूप से मौजूद नजर आते हैं। वे आमंत्रित सदस्य के रूप में बैठकों में शामिल होते थे और कई मुद्दों पर अपनी राय रखते थे। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के अहम फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

रामलला मंदिर में होने वाले बड़े धार्मिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक आयोजनों की जिम्मेदारी लंबे समय तक गोपाल राव संभालते रहे। मंदिर परिसर के कार्यक्रमों की तैयारियों और संचालन में भी उनकी भूमिका रही। हालांकि, 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में उन्हें पहली बार शामिल नहीं किया गया। सूत्रों का कहना है कि अब उन्हें ट्रस्ट की गतिविधियों से अलग कर दिया गया है। ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पहले जांच चढ़ावे में कथित गड़बड़ी तक सीमित थी, लेकिन अब पिछले दो वर्षों में ट्रस्ट द्वारा धार्मिक आयोजनों पर हुए खर्च की भी जांच हो रही है। जांच में करीब 124 करोड़ रुपये के खर्च शामिल हैं, जिनमें जनवरी 2024 के रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर हुए लगभग 113 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा नवंबर 2025 के ध्वजारोहण समारोह, प्रतिष्ठा द्वादशी और महाकुंभ से जुड़े खर्चों की भी जांच की जा रही है।

गौरतलब है कि अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है। गोपाल राव की भूमिका को लेकर भी केवल जांच और चर्चा का दौर चल रहा है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। ट्रस्ट की ओर से भी अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

फिलहाल सभी की निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि रिकॉर्ड और दस्तावेज पूरी तरह नियमों के अनुरूप पाए जाते हैं, तो इससे उठ रहे कई सवालों का भी जवाब मिल जाएगा। ऐसे में यह जांच न केवल कथित चढ़ावा चोरी मामले बल्कि मंदिर प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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